आजादी के 75 साल बाद भी नहीं बदली गांव की तस्वीर
रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के ग्राम पंचायत बनखेड़ी में एक दुखद और शर्मनाक घटना सामने आई है। आजादी के 75 साल बाद भी इस गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण ग्रामीणों और मृतक के परिजनों को मृतक कंछेदी लाल का अंतिम संस्कार दो बार करना पड़ा। बारिश के बीच खुले मैदान में अंतिम संस्कार करने की मजबूरी ने ग्रामीणों की पीड़ा को और बढ़ा दिया। यह घटना न केवल व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी उजागर करती है।
खुले मैदान में अंतिम संस्कार की मजबूरी
ग्राम बनखेड़ी, जो गैरतगंज मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है, वहां आज भी श्मशान घाट में टीनशेड जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है। मृतक कंछेदी लाल का अंतिम संस्कार खुले मैदान में करना पड़ा। अंतिम संस्कार के दौरान अचानक बारिश शुरू हो गई, जिसके कारण चिता की अग्नि बुझ गई। परिजनों और ग्रामीणों को मजबूरन चिता को दोबारा तैयार कर दूसरी बार अग्नि देनी पड़ी। यह स्थिति न केवल भावनात्मक रूप से दुखद थी, बल्कि ग्रामीणों के लिए शारीरिक और मानसिक कष्ट का कारण भी बनी।
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बारिश ने बढ़ाई परेशानी
अंतिम संस्कार के समय बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। खुले मैदान में बारिश से बचाव के लिए कोई छत या टीनशेड नहीं होने के कारण चिता को बचाना असंभव हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के बीच चिता को जलाने के लिए कई घंटों तक संघर्ष करना पड़ा। दूसरी बार चिता तैयार करने और अग्नि देने की प्रक्रिया ने परिजनों को गहरा आघात पहुंचाया। यह घटना ग्रामीणों के लिए एक कड़वा अनुभव बन गई, जो व्यवस्था की लापरवाही को उजागर करती है।
Double funeral Raisen: ग्रामीणों की पीड़ा
देश ने हाल ही में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया, लेकिन बनखेड़ी जैसे गांवों की स्थिति आज भी दयनीय है। ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट में टीनशेड की मांग वे वर्षों से करते आ रहे हैं, लेकिन सिस्टम में बैठे अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। बारिश में अंतिम संस्कार करने की मजबूरी ग्रामीणों के लिए न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह उनकी गरिमा पर भी सवाल उठाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
अली हसीन की रिपोर्ट
