दिल्ली की MDMA ड्रग्स रायपुर में बेचने वाली इंटीरियर डिजाइनर नव्या मलिक को रायपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने नव्या मलिक से 30 घंटे पूछताछ की। जिसमे उसने खुलासा किया कि 850 रईसजादे इस ड्रग्स सिंडिकेट के संपर्क में थे। जिसमें होटल कारोबारी और राजनेताओं के बेटों के नाम भी सामने आए हैं।
गुरुवार को कोर्ट में पेश हुए नव्या
नव्या को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे 3 दिन के रिमांड पर भेज दिया है। वहीं ड्रग्स तस्करी मामले में 4 और गिरफ्तारी हुई। विधि अग्रवाल, सोहेल खान , जुनैद अख्तर) और ऋषिराज टंडन को भी गिरफ्तार किया गया है। विधि अग्रवाल को भी 3 दिन की रिमांड पर भेजा गया है। एनडीपीएस कोर्ट ने 6 सितंबर तक पुलिस रिमांड की अनुमति दी है।माना जा रहा है कि पूछताछ में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। वहीं, अयान खान, जुबेर अख्तर और ऋषिराज टंडन को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
इनसे भी हुई पूछताछ
इस सिंडिकेट में कई युवतियां भी शामिल थीं। गिरफ्तार आरोपियों में पुलिस ने सबसे ज्यादा पूछताछ पंजाब निवासी लवजीत सिंह, रायपुर निवासी रुपिंदर उर्फ पिंदर सिंह उर्फ पाब्लो और रायपुर निवासी नव्या मलिक से की है।लवजीत और रुपिंदर से पुलिस को हेरोइन खरीदने वालों की और नव्या मलिक से एमडीएमए खरीदने वाले रसूखदारों की जानकारी मिली। इस ड्रग्स सिंडिकेट के संपर्क में 850 से ज्यादा रईसजादे थे। इनकी जानकारी जुटाई जा रही है। सभी से पूछताछ होगी और अवैध कारोबार में मदद करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
ड्रोन से ड्रग्स की सप्लाई
सूत्रों के अनुसार, पिंदर पाकिस्तानी ड्रग्स ड्रोन के माध्यम से बॉर्डर पार करवाता था, फिर उसके सिंडिकेट में काम करने वाले लड़के बॉर्डर इलाकों से ड्रग्स सिंडिकेट के ठिकानों तक पहुंचाते थे। इन ठिकानों से माल ट्रकों के माध्यम से राजधानी रायपुर समेत देश भर में भेजा जाता था।ट्रक से माल भेजने पर जब कार्रवाई शुरू हुई, तो अपने सिंडिकेट के लड़कों को माल के साथ पहले दिल्ली और फिर रायपुर भेजता था। कई बार रायपुर में सक्रिय लड़कों को माल लेने के लिए दिल्ली बुलाता था और दिल्ली-पंजाब का माल है बोलकर हेरोइन बेचते थे।
इस तरह चलता था सिंडिकेट
नव्या के खुलासे के बाद पुलिस ने शंकर नगर, पेंशनबाड़ा, समता कॉलोनी, राजेंद्र नगर, वीआईपी रोड, कटोरा तालाब, संतोषी नगर, देवेंद्र नगर और तेलीबांधा के कई बड़े कारोबारियों और रसूखदारों की सूची तैयार की है।आरोपियों ने बताया कि, नशे का कारोबार पहले वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए चलता था। बाद में केवल परिचित ग्राहकों को ही सप्लाई दी जाती थी। एडवांस लेकर होटल, पब, बार या आफ्टर पार्टी में डिलीवरी की जाती थी। इन पार्टियों में वही लोग शामिल होते थे, जो ऑनलाइन फॉर्म भरकर एंट्री पाते थे।
