रायगढ़ जिले में जंगली हाथियों के झुंड ने हाल ही में 15 किसानों की फसल को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। जंगल से निकलकर रास्तों और गांवों में घूम रहे इन हाथियों ने खेतों में घुसकर फसलें रौंद दी हैं। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत पानी की तरह बह गई है। जिले में लगभग 70 हाथी विभिन्न समूहों में विचरण कर रहे हैं, जिससे गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
वन विभाग और ग्रामीणों की स्थिति
वन विभाग ने हाथियों के इस व्यवहार पर कड़ा ध्यान दिया है और प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। ग्रामीणों को सतर्क रहने और अकेले जंगल की ओर न जाने की हिदायत दी गई है। वन विभाग फसल नुकसान का आंकलन कर मुआवजा प्रक्रिया भी शुरू कर रहा है, लेकिन किसानों के मुताबिक यह मुआवजा काफी कम और असमय है।
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हाथियों की संख्या और उनका व्यवहार
रायगढ़ के धरमजयगढ़ वन मंडल में लगभग 70 हाथी अलग-अलग झुंडों में विचरण कर रहे हैं। इनमें नर, मादा और शावक शामिल हैं। इनका धरती पर कब्जा बढ़ने के कारण वे खेती-किसानी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई बार हाथी गांवों के मकानों को भी नुकसान पहुँचाते हैं।
किसानों की मुश्किलें और समाधान
किसानों में थकान और निराशा बढ़ रही है क्योंकि वे अपनी सालभर की मेहनत को हाथियों की वजह से गंवा रहे हैं। ग्रामीण अब अपनी फसलों की रक्षा के लिए बुर्ज जैसे मचान बनाए हुए हैं जिससे वे रात में अपनी फसल की निगरानी कर सकें। वन विभाग से उम्मीद है कि भविष्य में फसलों को सुरक्षित रखने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
रायगढ़ जिले में हाथियों द्वारा किसानों की फसलों को लगातार नुकसान पहुंचाना एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। वन विभाग और सरकार को किसानों की सुरक्षा और मुआवजे के साथ-साथ जंगल और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी जिससे किसानों की खेती बचाई जा सके और हाथियों के झुंडों का प्रबंधन हो सके।
