rahul vs jayashankar : विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
rahul vs jayashankar : ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर छिड़े सियासी घमासान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर को घेर लिया है। राहुल गांधी का दावा है कि ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही पाकिस्तान को भारत की कार्रवाई की जानकारी दे दी गई थी — और यही सबसे बड़ी ‘भूल’ नहीं, बल्कि ‘अपराध’ थी।
राहुल ने 19 मई को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा:
“विदेश मंत्री जयशंकर की चुप्पी सिर्फ चुप्पी नहीं है – यह लानत है।”
उन्होंने पूछा:
“पाकिस्तान को अगर पहले से पता था, तो हमने कितने भारतीय विमान खोए? क्या यह किसी एक व्यक्ति का फैसला था? कौन जिम्मेदार है?”
📹 विवादित वीडियो में जयशंकर का क्या कहा गया?
इस पूरे मामले में आग में घी तब पड़ा जब राहुल गांधी ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें विदेश मंत्री जयशंकर यह कहते नजर आए:
“ऑपरेशन की शुरुआत में हमने पाकिस्तान को संदेश भेजा था कि हम आतंकवादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं, सेना को नहीं।”
राहुल का तर्क है कि इस बयान से साफ है कि भारत सरकार ने ऑपरेशन से पहले ही पाकिस्तान को सूचित कर दिया था, जिससे ऑपरेशन की गोपनीयता पर सवाल खड़े हो गए।
🛑 विदेश मंत्रालय ने क्या सफाई दी?
विदेश मंत्रालय ने राहुल गांधी के आरोपों को ‘तथ्यों की गलत व्याख्या’ करार दिया है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा:
“यह संदेश ऑपरेशन सिंदूर के शुरू होने के शुरुआती चरण में दिया गया था, न कि उससे पहले। तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।”
उन्होंने कहा कि सरकार ने किसी भी संवेदनशील जानकारी को लीक नहीं किया और ऑपरेशन की रणनीति पूरी तरह से सेना और सरकार के बीच गोपनीय रही।
🔥 राजनीतिक घमासान तेज
राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वे लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में आक्रामक भूमिका निभा रहे हैं। चुनावों के माहौल में कांग्रेस इसे मोदी सरकार की ‘कूटनीतिक चूक’ के रूप में पेश कर रही है।
गांधी ने कहा:
“देश को सच्चाई जानने का हक है। अगर सरकार ने दुश्मन को ऑपरेशन की जानकारी दी, तो यह ना सिर्फ रणनीतिक चूक थी, बल्कि हमारे जवानों के बलिदान का अपमान भी है।”
🗣️ जनता क्या सोच रही है?
सोशल मीडिया पर यह मुद्दा छा गया है। हैशटैग्स जैसे #OperationSindoor, #RahulAttacksJaishankar और #NationWantsTruth तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं। कुछ लोग सरकार से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, जबकि बीजेपी समर्थक इसे विपक्ष की “राजनीतिक नौटंकी” बता रहे हैं।
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