जब एटम बम फटेगा.. राहुल गांधी के तीखे शब्दों के पीछे छुपी सियासी बेचैनी
हमारे देश की राजनीति में बहुत कुछ कहा जाता है, लेकिन जब कोई नेता यह कहे कि “हमारे पास एटम बम है, जब फटेगा तो चुनाव आयोग बचेगा नहीं”, तो वह सिर्फ बयान नहीं होता वह गंभीर राजनीतिक आरोप और सिस्टम पर अविश्वास की गूंज बन जाता है।
राहुल गांधी, देश की सबसे पुरानी पार्टी के सांसद, बीते 9 दिनों में दो बार चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने न केवल अधिकारियों को ललकारा, बल्कि यह भी कहा कि उनके पास 100% सबूत हैं। ये शब्द किसी सामान्य विरोध का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बड़े संविधानिक टकराव की आहट हैं।
क्या है राहुल गांधी का आरोप?
1 अगस्त 2025 को संसद से बाहर निकलते हुए राहुल गांधी ने कहा:
“हमारे पास एटम बम है, जब फटेगा तो चुनाव आयोग बचेगा नहीं।”
इससे पहले 24 जुलाई को उन्होंने कहा था:
“अगर आपके अधिकारी सोचते हैं कि वे बच जाएंगे, तो ये आपकी गलतफहमी है।”
राहुल का दावा है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में चुनावी गड़बड़ियां हुईं। कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में 18+ आयु के मतदाताओं को हटाया गया, जबकि 50-65 साल के नए वोटर जोड़े गए। वोटर लिस्ट में भारी हेराफेरी कर कृत्रिम रूप से भाजपा को बढ़त दिलाई जा रही है।
बिहार का मामला: वोटर लिस्ट से गायब हुए 65 लाख नाम
राहुल गांधी की बातों को और हवा मिलती है बिहार के वोटर लिस्ट विवाद से। चुनाव आयोग ने वोटर वेरिफिकेशन अभियान (SIR) के तहत 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए। इनमें 22 लाख की मौत, 36 लाख का पलायन और 7 लाख की दोहरी एंट्री बताई गई।
लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह सिर्फ तकनीकी काम नहीं, बल्कि राजनीतिक साजिश है ताकि चुनावों से पहले विपक्ष के वोट बैंक को कमजोर किया जा सके।
राहुल के ‘एटम बम’ का क्या मतलब?
राहुल ने जिस “एटम बम” की बात की है, उसका तात्पर्य संभवतः एक ऐसा डॉक्यूमेंटेड, डेटा-प्रूफ स्कैंडल है, जिसे वे समय आने पर जनता के सामने पेश करने वाले हैं।
उन्होंने कहा:
“हमारे पास 100% सबूत हैं। जैसे ही इसे सार्वजनिक करेंगे, पूरा देश समझ जाएगा कि किस तरह चुनाव आयोग भाजपा के लिए काम कर रहा है।”
यह सिर्फ एक राजनीतिक पैंतरा नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सीधा सवाल है।
क्या राहुल का आरोप पहली बार है?
बिलकुल नहीं। 2019 के लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस ने EVM हैकिंग और मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। कर्नाटक चुनाव 2023 में भी वोटर डेटा चोरी को लेकर भाजपा समर्थित एक NGO के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। अब 2025 में यह आरोप और ज्यादा संगठित, डेटा-सपोर्टेड और आक्रामक रूप में सामने आ रहा है।
क्या चुनाव आयोग जवाब दे रहा है?
EC का कहना है कि वोटर लिस्ट से हटाए गए नाम पूरी तरह डिजिटल वेरिफिकेशन और फिजिकल सर्वे पर आधारित हैं। किसी भी मतदाता का नाम अगर गलत हटाया गया है तो वह फॉर्म-6A के जरिए पुनः जुड़ सकता है।
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