राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर CRPF की चिंता, 9 महीने में 6 बार विदेश गए
सुरक्षा कोई औपचारिकता नहीं होती, वो एक दीवार होती है – जो जान बचा सकती है। लेकिन जब कोई खुद ही उस दीवार को नजरअंदाज कर दे… तो फिर सवाल उठना लाज़मी है।
CRPF ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक चिट्ठी लिखी है, जो केवल एक पत्र नहीं, बल्कि एक अलार्म है। इसमें बताया गया कि राहुल गांधी बार-बार सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ रहे हैं — और वो भी बिना सूचना दिए विदेश यात्राओं के ज़रिए।
क्या है मामला? एक नज़र में समझिए
राहुल गांधी ने 9 महीनों में 6 बार विदेश यात्रा की: इटली, वियतनाम, दुबई, कतर, लंदन और मलेशिया CRPF का दावा: इन सभी यात्राओं के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ. येलो बुक नियम के अनुसार: विदेश यात्रा की सूचना पहले से देना अनिवार्य है CRPF ने राहुल को पहले भी चेताया था: 2020 से अब तक 113 बार सुरक्षा निर्देश तोड़े जा चुके हैं
Z+ सिक्योरिटी मिलना कोई मज़ाक नहीं होता…
राहुल गांधी को देश की सबसे उन्नत सुरक्षा – Z+ सिक्योरिटी मिली हुई है, जिसमें:
- 55 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं
- इनमें NSG के कमांडो, CRPF और लोकल पुलिस शामिल होती है
- हर यात्रा, हर मीटिंग, हर मूवमेंट का सुरक्षा आकलन पहले से किया जाता है
इसके लिए एक एडवांस सिक्योरिटी लाइजन कवर (ASL) होता है, जिसमें:
- संभावित खतरे की समीक्षा
- बम और विस्फोटकों की जांच
- इमरजेंसी एग्जिट प्लान
- लोकल इंटेलिजेंस इनपुट और कॉर्डिनेशन
सब कुछ पहले से तय होता है।
लेकिन CRPF के मुताबिक, राहुल बिना सूचना दिए विदेश चले जाते हैं, जिससे पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है।
अगस्त 2025 की एक तस्वीर ने फिर खड़े किए सवाल
पूर्णिया की रैली में जब एक युवक सुरक्षा घेरा तोड़कर राहुल को किस करने पहुंचा, तब भी CRPF ने चिंता जताई थी। सवाल उठा – अगर युवक के इरादे गलत होते तो क्या होता? क्या इतनी आसानी से कोई VIP के पास पहुंच जाना सही है?
CRPF की चिट्ठी में छिपा बड़ा संदेश
CRPF के VVIP सिक्योरिटी हेड सुनील जून ने खड़गे को जो पत्र लिखा, उसमें केवल शिकायत नहीं है, बल्कि एक स्पष्ट चेतावनी है इस तरह की चूक VVIP सुरक्षा को कमजोर करती है और जान को खतरा हो सकता है। अब यह केवल राहुल गांधी की नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की भी नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है कि ऐसी लापरवाही पर रोक लगे।
राहुल गांधी की तरफ से क्या आया जवाब?
अब तक कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि पहले भी जब सुरक्षा उल्लंघन की बात हुई, कांग्रेस नेताओं ने CRPF और केंद्र सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया था। लेकिन सवाल फिर वही – क्या सुरक्षा भी अब सियासत का हिस्सा बन चुकी है?
क्या SPG हटाने के बाद सचमुच खतरे बढ़े हैं?
2019 में मोदी सरकार ने गांधी परिवार से SPG (Special Protection Group) हटाकर CRPF को सुरक्षा जिम्मेदारी दी थी। उस समय भी काफी विवाद हुआ था।
अब जब राहुल बार-बार विदेश यात्राएं कर रहे हैं, बिना CRPF को बताए, तो कुछ लोग इसे जानबूझकर किया गया कदम मान रहे हैं,
जबकि कुछ इसे राजनीतिक अपरिपक्वता और गैर-जिम्मेदारी कह रहे हैं।
अब सवाल आपसे – क्या VVIP भी कानून से ऊपर हैं?
अगर आम नागरिक एयरपोर्ट पर अपनी फ्लाइट से पहले सुरक्षा जांच नहीं कराए तो क्या होगा? तो फिर एक राष्ट्रीय नेता, जिसकी सुरक्षा में दर्जनों जवान तैनात रहते हैं, अगर बिना बताए देश छोड़ते हैं, तो क्या वो ‘अदृश्य विशेषाधिकार’ का इस्तेमाल कर रहे हैं? देश के हर नागरिक को सोचना चाहिए सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ना कोई ‘स्टाइल स्टेटमेंट’ नहीं, एक राष्ट्रीय खतरा है।
सुरक्षा को लेकर राजनीति नहीं, जिम्मेदारी ज़रूरी है
राहुल गांधी एक प्रमुख विपक्षी नेता हैं। उन्हें जनता ने चुना है, उन्हें बोलने, घूमने और विरोध करने का हक है। लेकिन जब सवाल सुरक्षा का हो तो कोई छूट नहीं होनी चाहिए। CRPF की चिट्ठी एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, ये एक सुरक्षा एजेंसी की सच्ची, कड़वी और जरूरी चेतावनी है।
अब फैसला राहुल गांधी को करना है वो सुरक्षा को गंभीरता से लेंगे या राजनीति का हिस्सा बनाएंगे?
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