राजनीति सड़क पर उतर आई
राजनीति की सबसे बड़ी लड़ाइयां अक्सर संसद में नहीं, सड़क पर लड़ी जाती हैं और रायबरेली इस बार उसका सबसे ताज़ा उदाहरण बन गया।

एक ओर स्वागत के लिए बैंड-बाजे थे, गुलाबों की बारिश थी, राहुल गांधी ज़िंदाबाद के नारे थे। दूसरी ओर, राहुल वापस जाओ की गूंज, विरोध में बैठा एक मंत्री, और काफिले को रोकती भीड़। ये कोई फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि 10 सितंबर 2025 की वो हकीकत थी जिसने रायबरेली की सड़कों को सियासत की आग में झोंक दिया।
विरोध में उतरे मंत्री, टकराव की स्थिति बनी
सुबह से ही माहौल गर्म था। जब राहुल गांधी का काफिला रायबरेली में दाखिल हो रहा था, तभी योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह अपने समर्थकों के साथ रास्ते पर धरने पर बैठ गए।
आरोप?
>>>>राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को अपमानित किया, उनके समर्थक अपशब्द कह रहे हैं और कांग्रेस नेतृत्व चुप है। राहुल माफी मांगो, राहुल वापस जाओ के नारों के बीच, पुलिस ने जब मंत्री को हटाने की कोशिश की, तो भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्कामुक्की हो गई।
इस झड़प के बीच, राहुल का काफिला 5 मिनट तक रुका रहा।

आख़िरकार रास्ता बदला गया और राहुल बटोही रिसॉर्ट की ओर रवाना हो गए।
राहुल बोले: अब दाल में कुछ काला नहीं, पूरी की पूरी दाल ही काली है
राहुल गांधी ने रिसॉर्ट में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा
पहले लोग कहते थे दाल में कुछ काला है। अब तो पूरी दाल ही काली है, और सबूत हमारे पास हैं। वोट चोरी हो रही है, और चुनाव आयोग चुप बैठा है। तानाशाही चल रही है।
उनका भाषण छोटा था, पर चोट गहरी थी।
उन्होंने साफ कहा कि ये लड़ाई सिर्फ कांग्रेस की नहीं, जनता की लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है।
पोस्टर वार: राहुल-अखिलेश-तेजस्वी बने ‘त्रिदेव’
राहुल के दौरे से पहले ही रायबरेली में एक पोस्टर वायरल हो गया जिसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में दर्शाया गया।
पोस्टर लगाने वाले सपा नेता राहुल निर्मल बागी ने कहा:
ये तीनों नेता आज के युग में दबे-कुचले लोगों की आवाज़ हैं। यही कलयुग के त्रिदेव हैं।
हालांकि बीजेपी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता आनंद दुबे बोले
यह हिन्दू धर्म का अपमान है। ये लोग चुनाव आते ही रंग बदलते हैं इच्छाधारी हिंदू की तरह।
क्या यह ‘अपनी गली में ललकारने’ जैसी हरकत नहीं?
कांग्रेस नेता और पूर्व MLC दीपक सिंह ने दिनेश प्रताप सिंह के विरोध को ओछी और तुच्छ हरकत बताया।
जिस पार्टी ने उन्हें राजनीतिक पहचान दी, उन्हीं के बेटे (राहुल गांधी) के विरोध में मंत्री रास्ते पर बैठ रहे हैं। अपनी गली में कौन ललकारता है?
दीपक सिंह ने यह भी याद दिलाया कि दिनेश प्रताप सिंह बसपा, सपा और कांग्रेस तीनों से होकर अब भाजपा में मंत्री बने हैं और हर पार्टी को छोड़ने से पहले गालियां ही दीं।

काफिले में स्वागत और संकोच दोनों के बीच फंसे राहुल
राहुल गांधी के स्वागत के लिए रायबरेली के हरचंदपुर, बछरावां और गोरा बाजार में भारी भीड़ उमड़ी। कहीं बैंड-बाजे बजे, तो कहीं हाथों में फूलों के गुलदस्ते लिए कार्यकर्ता खड़े थे। लेकिन हर जगह सियासत भी पीछे नहीं थी। चुरुवा हनुमान मंदिर पर रुकने की योजना थी, लेकिन काफिला बिना दर्शन किए आगे निकल गया शायद माहौल की नज़ाकत को देखते हुए।
अब आगे क्या?
राहुल गांधी का यह रायबरेली दौरा सिर्फ एक राजनीतिक शो नहीं था। यह एक साफ संदेश था चुप नहीं बैठेंगे। चुनाव आयोग की चुप्पी और सत्ता के दंभ के खिलाफ आवाज़ उठती रहेगी।
लेकिन ये भी साफ है कि भाजपा की रणनीति भी आक्रामक है। पोस्टर से लेकर प्रदर्शन तक, हर मोर्चे पर घेरने की तैयारी है।
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