राहुल गांधी का तगड़ा हमला – मोदी पर ट्रम्प धमकियों के सामने घुटने टेके
पिछले 10 दिनों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है — इस बार सीधे तौर पर US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकियों और अडाणी पर चल रही अमेरिकी जांच की बिन्दियों पर।

राहुल का आरोप: मोदी ट्रम्प के सामने खड़े नहीं हो पा रहे
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ट्रम्प लगातार भारत पर बड़ी टैरिफ, अर्थव्यवस्था की आलोचनाएं और अडाणी समूह की वित्तीय बेईमानी को लेकर दबाव बना रहे हैं। लेकिन मोदी इस दबाव का सामना नहीं कर पा रहे, क्योंकि अडाणी के खिलाफ चल रही जांच ने उनके हाथ बांधे हुए हैं।
अमेरिकी जांच में क्या है उलझा?
पिछले वर्ष अडाणी सहित आठ लोगों पर आरोप लगाए गए थे आरोप था कि Renewable Energy प्रोजेक्ट्स में रिश्वत और फर्जीवाड़ा किया गया अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी गई थी यह जांच अब भी जारी है राहुल ने इसे प्रधानमंत्री एवं आर्थिक दलालों की मिलीभगत बताकर मोदी को निशाने पर रखा।
राहुल की लगातार बयानबाज़ी- तीन मुद्दे:
- 31 जुलाई: राहुल ने कहा कि ट्रम्प की बात सच है — “भारतीय अर्थव्यवस्था ‘Dead Economy’ है, मोदी ने इसे मारा।”
- 28 जुलाई: लोकसभा बहस में बोले — “अगर PM में दम है तो कहें ट्रम्प झूठे बोल रहे; ऑपरेशन सिंदूर में भारत का एक भी फाइटर जेट नहीं गिरा।”
- आज (बुधवार): उन्होंने आरोप लगाया — “ट्रम्प धमका रहे, मोदी अडाणी-अंबानी गठजोड़ की वजह से जवाब नहीं दे पा रहे।”
टैरिफ और तेल-तेलियों का विवाद
- 30 जुलाई: ट्रम्प ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की
- तर्क: भारत रूस से सस्ता तेल खरीद रहा और उसे खुली मार्केट में बेच रहा
- इससे यूक्रेन युद्ध में रूसी वॉर मशीन को सपोर्ट मिल रहा है
- भारत की रूसी तेल आयात दर— 2025 में हर दिन लगभग 17.8 लाख बैरल
- पिछले दो साल में भारत ने रूस से लगभग 130 अरब डॉलर (11.3 ट्रिलियन रुपये) के तेल खरीदे
राहुल का कहना है कि मोदी सरकार इस व्यापारिक रणनीति को नहीं रोक पा रही, क्योंकि अडाणी जांच उनके पीछे लटकी हुई तलवार की तरह है।

राहुल की नफे- नुकसान की गणना
राहुल का आरोप है:
“मोदी और FM को छोड़कर सभी जानते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था डेड है।”
यह बयान मोदी सरकार की नीतियों और आर्थिक कमजोरियों पर कटाक्ष था, जिसे राहुल ने ट्रम्प की टिप्पणियों के आधार पर पुष्टि की।
राजनीति या आर्थिक चिंतन?
राहुल गांधी की तीखी नाराजगी मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दों पर टिकी है अडाणी-अंबानी गठजोड़ जो कथित भ्रष्टाचार का केंद्र माना जाता है भारत‑अमेरिका टकराव जिसमें ट्रम्प की धमकियाँ भारत पर दबाव डाल रही हैं राहुल गांधी की धमकी है: अगर मोदी में क्षमता होती तो वो ट्रम्प से सीधा मुंहतोड़ जवाब दे सकते थे। लेकिन अडाणी जांच के चलते मोदी गांधी को पकड़ नहीं पा रहे।
