कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश की मौजूदा स्थिति पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि पूरे भारत में लालच की महामारी फैल चुकी है। उन्होंने इसे सिर्फ नैतिक संकट नहीं, बल्कि शहरी बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया। राहुल ने जनता से अपील की कि वह सरकार से जवाबदेही की मांग करे, क्योंकि बिना सवाल पूछे लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता।
शहरी हालात को बताया सबसे भयावह चेहरा
अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि लालच की इस महामारी का सबसे डरावना रूप शहरों की बदहाल स्थिति में दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों और बड़े कॉरपोरेट घरानों के बीच सांठगांठ ने व्यवस्था को कमजोर कर दिया है।
राहुल के मुताबिक, लोकतंत्र की मूल भावना तभी जीवित रह सकती है जब आम लोग सवाल पूछें और जिम्मेदारी तय करें। उन्होंने लिखा कि जब सत्ता और पूंजी एक-दूसरे की पीठ थपथपाने लगती हैं, तब नुकसान जनता को उठाना पड़ता है।
दिल्ली के इलाके का वीडियो किया साझा
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के साथ एक मीडिया रिपोर्ट का वीडियो भी साझा किया। यह वीडियो कथित तौर पर दिल्ली के मुबारकपुर डाबस स्थित शर्मा एन्क्लेव का बताया जा रहा है। वीडियो में सीवर ओवरफ्लो होने के कारण सड़कों और रिहायशी इलाकों में फैला गंदा पानी साफ देखा जा सकता है।
इस वीडियो को साझा करते हुए राहुल गांधी ने लिखा कि आज एक आम भारतीय की जिंदगी इसी तरह नर्क जैसी यातना बन चुकी है। उन्होंने कहा कि सिस्टम सत्ता में बैठे लोगों के हाथ बिक चुका है और इसका खामियाजा आम नागरिक भुगत रहा है।
जवाबदेही नहीं मांगी तो हालात और बिगड़ेंगे
राहुल गांधी ने अपने बयान में चेतावनी भरे लहजे का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि समाज इसलिए सड़ रहा है क्योंकि इस बदहाली को सामान्य मान लिया गया है। लोगों की उदासीनता और चुप्पी हालात को और गंभीर बना रही है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर जनता ने जवाबदेही की मांग नहीं की, तो यह सड़ांध हर दरवाजे तक पहुंच जाएगी। यह सिर्फ किसी एक शहर या इलाके की समस्या नहीं है, बल्कि देशव्यापी संकट बन चुका है।
#TINA हैशटैग के जरिए उठाया सवाल
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में #TINA हैशटैग का इस्तेमाल किया, जिसका अर्थ है There Is No Accountability। इससे पहले भी वह जवाबदेही के मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं।
कुछ दिन पहले नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के बाद भी राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को उठाया था। उन्होंने उस घटना को लालच की संस्कृति और प्रशासनिक असंवेदनशीलता का नतीजा बताया था।
नोएडा हादसे का किया था जिक्र
मृतक की पहचान 27 वर्षीय युवराज मेहता के रूप में हुई थी, जो गुरुग्राम में काम करता था। 16 जनवरी की रात वह घर लौट रहा था, तभी उसकी कार एक निर्माणाधीन स्थल के पास पानी से भरे गड्ढे में गिर गई।
बताया गया कि युवराज करीब दो घंटे तक मदद के लिए पुकारता रहा, लेकिन समय पर सहायता नहीं पहुंच पाई। बाद में उसकी मौत हो गई। इस घटना ने शहरी बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
