
Rahul Gandhi : भूपेश बघेल ने बताया कैसे होगा पॉवर बैलेंस
Rahul Gandhi : छत्तीसगढ़ में भले ही अभी चुनावों में लंबा समय बाकि है, लेकिन राहुल गांधी यहां कांग्रेस के संगठन को अभी मजबूत करने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं. यही वजह है कि उनका फोकस छत्तीसगढ़ पर दिख रहा है.
राहुल गांधी की रणनीति क्या है?
राहुल गांधी कांग्रेस के संगठन को जिलास्तर से लेकर हाईकमान तक फिर से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके तहत, वे पहली बार सीधे जिलाध्यक्षों से संवाद कर रहे हैं। 27 मार्च से देशभर के अलग-अलग राज्यों से जिलाध्यक्षों को बुलाया गया था, ताकि पार्टी की ग्राउंड रिपोर्ट सीधे हाईकमान तक पहुंचे। अब, कल 3 अप्रैल को छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जिलाध्यक्षों से मुलाकात होगी, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद रहेंगे।
बूथ स्तर तक कांग्रेस को मजबूत करने का फॉर्मूला
बूथ स्तर तक कांग्रेस को मजबूत करने के इस फॉर्मूले से राहुल प्रदेश नेतृत्व के असर को कम करते हुए संगठन की सीधी मॉनिटरिंग करना चाहते हैं। इससे गुटबाजी पर रोक लग सकती है, लेकिन प्रदेश के बड़े नेताओं की भूमिका कमजोर भी हो सकती है। जिले में बूथ से लेकर सेक्टर, जोन कमेटी और ब्लॉक अध्यक्षों की जो सूची तैयार की गई है, साथ ही यहां की संपत्तियों से संबंधित सारी जानकारी भी AICC से मंगाई गई है।
दिल्ली में हुई थी महासचिवों के बैठक
जिलाध्यक्षों से संवाद से पहले दिल्ली में कांग्रेस महासचिवों की बैठक हुई थी। इस बैठक में दो महासचिवों ने आपत्ति जताई कि अगर जिलाध्यक्षों को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठकों में शामिल किया गया, तो इससे प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता की ताकत कम हो जाएगी। लेकिन राहुल गांधी ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए साफ कहा, ‘अगर जिलाध्यक्ष थोड़ा ताकतवर हो जाएगा, तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है।’ उनके इस बयान से साफ है कि वे संगठन में नीचे तक नेतृत्व को मजबूत करने और हाईकमान की सीधी पकड़ बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
संगठन मजबूत करने की तैयारी- भूपेश बघेल
भूपेश बघेल ने कहा ‘कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने के लिए जुटी है, यह साल हमारा संगठन मजबूत करने पर भी फोकस रहा है, यही वजह है कि एक साल के अंदर ही हम बूथ लेवल से संगठन लेवल तक को मजबूत करेंगे. राहुल गांधी जमीनी स्तर को जानने के लिए जिलाध्यक्षों के साथ बैठक करेंगे, जो स्थिति को समझने के लिए एक अच्छी कोशिश है.’ माना जा रहा है कि ग्राउंड रिपोर्ट के हिसाब से ही छत्तीसगढ़ में आगे की रणनीति बनेगी.
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