भारत की एयरोस्पेस निर्माण क्षमताओं में मील का पत्थर
भारत की एयरोस्पेस उद्योग में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए दासो एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने राफेल लड़ाकू विमान के फ्यूज़लेज को भारत में बनाने के लिए चार प्रोडक्शन ट्रांसफर एग्रीमेंट्स पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के साथ-साथ देश की एयरोस्पेस क्षमताओं को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा।
हैदराबाद में अत्याधुनिक उत्पादन संयंत्र
इस साझेदारी के तहत टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स हैदराबाद में एक अत्याधुनिक उत्पादन संयंत्र स्थापित करेगा, जिसमें राफेल के प्रमुख संरचनात्मक घटकों का निर्माण होगा। इनमें शामिल हैं:
- रियर फ्यूज़लेज के लेटरल शेल्स
- पूरा रियर सेक्शन
- केंद्रीय फ्यूज़लेज
- फ्रंट सेक्शन
यह सुविधा भारत के एयरोस्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
पहली बार भारत में होगा राफेल फ्यूज़लेज का उत्पादन
यह फ्यूज़लेज अब तक केवल फ्रांस में बनाए जाते थे, लेकिन इस समझौते के साथ यह उत्पादन भारत में शुरू होगा। दासो एविएशन के चेयरमैन और सीईओ, एरिक ट्रैपियर ने एक बयान में कहा,
“यह पहली बार होगा जब राफेल फ्यूज़लेज फ्रांस के बाहर बनाए जाएंगे। यह हमारे आपूर्ति श्रृंखला को भारत में मजबूत करने के लिए एक निर्णायक कदम है। हमारे स्थानीय साझेदारों, जिसमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) भी शामिल है, के विस्तार के साथ यह आपूर्ति श्रृंखला राफेल के सफल उत्पादन में योगदान करेगी और हमारे गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा की आवश्यकताओं को पूरा करेगी।”
भारत की एयरोस्पेस यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के सीईओ और प्रबंध निदेशक, सुकरन सिंह ने कहा,
“राफेल फ्यूज़लेज का भारत में निर्माण भारत की एयरोस्पेस यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह साझेदारी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स की क्षमताओं पर बढ़ते विश्वास और दासो एविएशन के साथ हमारे सहयोग की मजबूती को दर्शाती है। यह भारत की आधुनिक, मजबूत एयरोस्पेस निर्माण प्रणाली को भी प्रमाणित करता है, जो वैश्विक प्लेटफार्मों का समर्थन कर सकती है।”
भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम
यह समझौता भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों के प्रति दासो एविएशन की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस साझेदारी का उद्देश्य भारत को वैश्विक एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना है, साथ ही साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी समर्थन देना है।
उत्पादन के शुरुआती चरण और भविष्य की योजना
इस संयंत्र में FY2028 तक राफेल के पहले फ्यूज़लेज के निर्माण की उम्मीद है। यह सुविधा हर महीने दो पूरे फ्यूज़लेज तक निर्माण करने की क्षमता रखेगी।
यह कदम भारत के एयरोस्पेस उद्योग के लिए एक बड़ी छलांग है और वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीकी और निर्माण क्षमताओं को और मजबूत करेगा।
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