Pushkar Fair 2025 last holy bath : राजस्थान के पुष्कर में सालाना लगने वाला प्रसिद्ध पुष्कर मेला 2025 का भव्य आयोजन शुरू हो चुका है। यह मेला धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन का अनूठा संगम है जो सालभर लाखों श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को आकर्षित करता है।
पंचतीर्थ का आखिरी महास्नान
कार्तिक महीने की पूर्णिमा तिथि को पुष्कर सरोवर में होने वाला स्नान विशेष धार्मिक महत्व रखता है। पुष्कर मेले के दौरान पंचतीर्थ के तीर्थयात्री अंतिम महास्नान के लिए यहां पहुंचते हैं। यह स्नान मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग माना जाता है, जहां श्रद्धालु पापों से मुक्ति के लिए गंगा जी की निर्मलता में डुबकी लगाते हैं।
पहली बार आयोजित कैमल और हॉर्स शो
इस साल मेले में पहली बार कैमल और हॉर्स शो का आयोजन किया गया है, जिसे केंद्रीय मंत्री और कैबिनेट मंत्रियों ने उद्घाटन किया। यह शो पुष्कर मेला की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। ऊंटों की दौड़, घोड़ों का प्रदर्शन और पारंपरिक नृत्य समारोह दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।
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मेले की धार्मिक और सांस्कृतिक विशेषताएं
पुष्कर मेला केवल एक पशु मेला नहीं, बल्कि एक धार्मिक पर्व है जिसमें पूजा, तीर्थयात्रा के साथ लोक संस्कृति के आकर्षणों का भी सामंजस्य होता है। मेले में आयोजित होते हैं लोक संगीत, लोक नृत्य, क्षेत्रीय हस्तशिल्प, और विभिन्न प्रतियोगिताएं जो मेले को और भी जीवंत बना देती हैं।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़
देश-विदेश से लाखों लोग पुष्कर मेला में शामिल होने आते हैं। श्रद्धालु पुष्कर सरोवर के घाटों पर पवित्र स्नान करते हैं, वहीं पर्यटक मेले की रंगीनियत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं। प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं का विशेष प्रबंध किया है जिससे सभी को एक सुखद और सुरक्षित अनुभव मिल सके।
प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा
मेला स्थल पर पुलिस बल, स्वास्थ्य सेवाएं, और यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है। कोविड-19 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए भी सतर्कता बरती जा रही है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए अनेक सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं।
पुष्कर मेला 2025 न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का भी उत्सव है। इस मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समागम इसे एक बेजोड़ पर्व बनाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर, और पर्यटकों के लिए सांस्कृतिक आनंद का स्रोत है.
