puri rath yatra 2025: क्यों तोड़े जाते हैं रथ, राज़ जानकर चौंक जाएंगे!
puri rath yatra 2025: ओडिशा के पुरी में 27 जून 2025 को दुनिया की सबसे भव्य धार्मिक यात्राओं में से एक – जगन्नाथ रथयात्रा निकलेगी। भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के लिए बने तीन विशाल रथ भक्तों द्वारा खींचे जाएंगे। पर क्या आपने कभी सोचा है कि ये रथ हर साल नए क्यों बनते हैं? और यात्रा के बाद इन्हें तोड़ क्यों दिया जाता है?
कैसे बनते हैं ये रथ? सिर्फ 58 दिनों में चमत्कार!
- रथ बनाने का काम अक्षय तृतीया से शुरू होता है, जो आमतौर पर मई की शुरुआत में आता है।
- कुल 200 से अधिक लकड़हारे, बढ़ई और शिल्पकार इस निर्माण में जुटते हैं।
- रथ पूरी तरह हाथ से बनाए जाते हैं, कोई आधुनिक मशीन या स्केल नहीं इस्तेमाल होता।
- माप के लिए ‘डांडी’ (छड़ी) का उपयोग होता है, जो पारंपरिक मापदंड है।
- हर रथ की ऊंचाई लगभग 45 फीट होती है और वजन 200 टन से ज्यादा।
- रथ बनाने में 5 खास किस्म की लकड़ियाँ लगती हैं जैसे कि फासी, असन, ढोसा, सिमिली और महुआ।
कौन-कौन से हैं तीन रथ?
| भगवान | रथ का नाम | रंग | पहिए | झंडा |
|---|---|---|---|---|
| जगन्नाथ | नंदीघोष | लाल-पीला | 16 | गरुड़ |
| बलभद्र | तालध्वज | लाल-नीला | 14 | हनुमान |
| सुभद्रा | दर्पदलन | लाल-काला | 12 | कमल |
रथयात्रा के बाद क्या होता है इन रथों का?
जगन्नाथ जी की रथयात्रा गुंडिचा मंदिर तक जाती है। यहां 7 दिन रुकने के बाद फिर बहुदा यात्रा में रथ वापस मुख्य मंदिर लाए जाते हैं। पर यात्रा पूरी होते ही…
✅ रथों को तोड़ दिया जाता है।
क्यों?
- शुद्धता और परंपरा: ये रथ केवल एक बार उपयोग में आते हैं। अगली बार फिर नया रथ, नई यात्रा और नई शुरुआत।
- सांकेतिक महत्व: यह जीवन की अनित्यता और पुनर्जन्म की अवधारणा को दर्शाता है।
- आध्यात्मिक उपयोग: टूटे रथों की लकड़ी का उपयोग रसोई में जलाने, मंदिर के रथ खंभों में लगाने, या पवित्र चीज़ें बनाने में किया जाता है।
रथयात्रा क्यों है विश्व प्रसिद्ध?
- पुरी की रथयात्रा दुनिया की इकलौती ऐसी यात्रा है जिसमें भगवान खुद भक्तों के पास आते हैं।
- इसे देखने हर साल लाखों की संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं।
- यही कारण है कि ये आयोजन “वॉकिंग गॉड्स का त्यौहार” कहलाता है।
लाइव दर्शन और सुरक्षा इंतज़ाम
- पुरी रथयात्रा को दुनियाभर में लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा।
- इस बार सुरक्षा के लिए 5,000 से ज्यादा जवान, ड्रोन कैमरे, और हेलीकॉप्टर से निगरानी की व्यवस्था की गई है।
हर छड़ी में आस्था की कहानी
पुरी की रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि यह संस्कृति, परंपरा, आस्था और आत्मसमर्पण का जीवंत उदाहरण है।
हर साल नए रथ बनाकर और उन्हें तोड़ कर हम ये सिखते हैं कि हर शुरुआत का एक अंत होता है, और हर अंत एक नई शुरुआत की ओर ले जाता है।
📢 क्या आप रथयात्रा देखने जा रहे हैं? या टीवी पर देखेंगे? अपने अनुभव हमें ज़रूर बताएं!
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