PPF यानी पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड एक लोकप्रिय इन्वेस्टमेंट स्कीम हैँ जिसे केंद्र सरकार की मदद से पोस्ट ऑफिस
एवं राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा संचालित किया जाता हैँ | यह स्कीम इन्वेस्टर्स को बचत एवं निवेश दोनों देती हैँ साथ ही
लम्बी अवधि के निवेश की सबसे सफल इन्वेस्टमेंट स्कीम हैँ जिसमे invested principal, earned interest और
final maturity amount पूरी तरह से इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत taxfree होते हैँ |
1st Oct से लागू नये प्रावधान –
PPF नियम में जो नये बदलाव किये गये हैँ उसमे मुख्यतः एक से ज़्यादा PPF अकाउंट, नाबालिगों (minors) के नाम
पर खोले गये PPF अकाउंट, पोस्ट ऑफिस के माध्यम से NRIs (नॉन रेसीडेंस्ट इंडियंस) के PPF एकाउंट्स के
विस्तारिकरण से जुड़े नियम हैँ |
एक से ज़्यादा PPF अकाउंट –
किसी भी पोस्ट ऑफिस या राष्ट्रीयकृत बैंक में यदि व्यक्ति के एक से ज़्यादा PPF अकाउंट हैँ तो उसे स्कीम रेट के
हिसाब से ब्याज़ दिया जायेगा लेकिन इन्वेस्टमेंट की लिमिट रु 1.50 लाख से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए I अगर दोनों
अकाउंट में कुल मिलाकर राशि लिमिट से ज़्यादा जमा हैँ तो लिमिट की राशि घटाकर शेष बची हर राशि पर नार्मल
सेविंग बैंक अकाउंट पर जो ब्याज़ देय है वो दिया जायेगा I
Minors PPF अकाउंट –
नये नियम के अनुसार माइनॉर्स के नाम से खोले गये PPF अकाउंट पर जब तक की माइनॉर बालिग यानी 18 वर्ष की
आयु का नहीं हो जाता तब तक उसे नार्मल बैंक खाते के हिसाब से ब्याज़ दिया जायेगा बालिग होने के पश्चात्
maturity पीरियड की गणना की जाएगी और फिर उस आधार से ब्याज़ की गणना लागू होगी I
NRIs PPF अकाउंट –
NRIs द्वारा खोले गये PPF एकाउंट्स में 1968 की पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड स्कीम के अंतर्गत फॉर्म H में खाताधारक
के रेजिडेंशियल स्टेटस के बारे में नहीं पूछा गया था इसीलिए इन खातों पर 30 सितम्बर तक पोस्ट ऑफिस सेविंग्स
खाते में देय ब्याज़ अनुसार ब्याज़ दिया जायेगा इसके बाद किसी भी प्रकार का ब्याज़ देय नहीं होगा I
