भीखमंगिया दीदी’ नहीं बनना चाहतीं महिलाएं: गूंजा–वोट चोर, गद्दी छोड़!

महिलाओं ने प्रियंका के सामने बताया अपना दर्द
priyanka gandhi women voices shakti adhikar rally: पटना के सदाकत आश्रम में आज का दिन सिर्फ़ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था। यह एक ऐसा पल था जब आवाज़ें दीवारें तोड़ती हुई निकलीं — महिलाओं की वो आवाज़ें, जो बरसों से घरों, खेतों और पंचायतों में दबी रहीं।
यह कार्यक्रम कोई मंचीय भाषण नहीं था। यह संवाद था। “शक्ति अधिकार” के नाम से शुरू हुए इस कार्यक्रम में, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने हजारों महिलाओं से सीधा संवाद किया। लेकिन ये संवाद सिर्फ़ बातों का नहीं था — यह एक इमोशनल दस्तावेज़ बन गया है उस संघर्ष का, जो हर आम महिला रोज़ झेलती है।
सड़कों से उठी आवाज़
कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही सदाकत आश्रम के बाहर नारे लगने लगे वोट चोर, गद्दी छोड़! ये नारा सिर्फ़ गुस्सा नहीं था, यह उस निराशा का शोर था जिसे महिलाएं सालों से झेल रही हैं। भीड़ में मौजूद एक महिला ने कहा
“मनरेगा की मजदूरी दो महीने से नहीं मिली। सरकार कहती है महिला सशक्तीकरण, लेकिन ज़मीन पर हम भीख मांगने को मजबूर हैं।”
एक-एक कर महिलाएं मंच पर आईं, तो मंच भी थोड़ी देर को झुक गया
प्रियंका गांधी ने एक-एक महिला की बात ध्यान से सुनी। कोई घरों में झाड़ू-पोंछा करने वाली थी, कोई मनरेगा मजदूर, कोई आशा वर्कर, तो कोई वकील या डॉक्टर। एक महिला ने कहा
“नीतीश कुमार ने हम जीविका दीदियों को भीखमंगिया दीदी बना दिया है।”
प्रियंका ने उन्हें पानी दिया, बातों में भरोसा दिया और कहा,
“आप अपनी शक्ति को नहीं पहचानतीं, लेकिन पार्टियां पहचान रही हैं। इसलिए चुनाव से पहले आपको पैसे दिए जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है – आपके बिना सरकार नहीं बन सकती।”
यह सिर्फ़ एक राजनीतिक दौरा नहीं – यह भावनाओं की राजनीति थी

मोतिहारी में होगा दूसरा पड़ाव
पटना के संवाद के बाद प्रियंका गांधी मोतिहारी के गांधी मैदान में एक बड़ी जनसभा करेंगी। यह उनका बिहार में पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम है।
20,000 से ज्यादा महिलाओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। मंच पर उनके साथ होंगे
- कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम
- बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू
- और कांग्रेस के अन्य सांसद
महिला ने कहा “मैं प्रियंका के साथ हूं”
गया से आईं नेहा यादव की बात पूरे कार्यक्रम की आत्मा बन गई। उन्होंने कहा
मैं प्रियंका गांधी से मिल चुकी हूं। मैं उन्हें पसंद करती हूं और कांग्रेस को ही वोट दूंगी।
यह संवाद एक राजनीतिक वादा नहीं था यह एक भावनात्मक सौदा था, जहाँ महिलाओं ने अपना दर्द, अपनी उम्मीद और अपना विश्वास प्रियंका गांधी के सामने रखा।
