Naxal pressure after encounter : नक्सलियों ने छह महीने के लिए युद्ध विराम की घोषणा की है। नक्सली नेता जगन ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार संवाद और शांति की प्रक्रिया को बाधित कर माहौल बिगाड़ रही है। उन्होंने तेलंगाना सरकार से भी अपील की है कि वे इस शांति प्रयास का समर्थन करें और पहले की तरह सहयोग करते रहें। इस बीच तेलंगाना सरकार ने नक्सलियों के शांति प्रयास को समर्थन दिया है और कहा है कि क्षेत्र में शांति बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।
युद्ध विराम की घोषणा
जगन ने एक बयान जारी कर कहा कि छह महीने के युद्ध विराम का उद्देश्य शांति स्थापना और बातचीत के लिए उपयुक्त माहौल तैयार करना है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाए कि वह वार्ता की प्रक्रिया में बाधा डाले बिना राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, यदि केंद्र सरकार वाकई शांति चाहती है तो उसे युद्ध विराम का सम्मान करना चाहिए और दोनों पक्षों के बीच भरोसे का माहौल बनाना चाहिए।
तेलंगाना सरकार का समर्थन
तेलंगाना सरकार ने नक्सलियों के इस शांति प्रस्ताव का खुले तौर पर समर्थन किया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि क्षेत्र में स्थिरता और विकास के लिए संवाद जरूरी है और इसी को ध्यान में रखते हुए शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए। नक्सली नेता जगन की इस अपील के जवाब में तेलंगाना की राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि वे संवाद प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएंगे और शांति अभियान को समर्थन देंगे।
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केंद्र सरकार पर आरोप
जगन ने कहा कि केंद्र सरकार राजनीतिक स्वरूप में माहौल बिगाड़ रही है जिससे शांति प्रयास प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ गंभीर दावे किए कि वह नक्सलियों के बीच दुष्प्रचार फैला रही है और जानबूझकर शांति प्रक्रिया को असफल बनाने की कोशिश कर रही है। इस स्थिति ने शांति वार्ता को जटिल बना दिया है और भविष्य की बातचीत में सुझावों के संदर्भ में संशय पैदा कर दिया है।
शांति प्रक्रिया की चुनौतियां
यह युद्ध विराम पहल नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, परंतु राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस प्रक्रिया का सुचारु संचालन एक चुनौती है। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल का अभाव, स्थानीय प्रशासन की समस्याएं एवं उग्रवादियों के अंदर मौजूद मतभेद भी शांति प्रयासों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए, सभी पक्षों का सहयोग और पारदर्शिता इस प्रक्रिया की सफलता की कुंजी होगी।
नक्सलियों द्वारा छह महीने के लिए युद्ध विराम की घोषणा, जगन के केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोप, और तेलंगाना सरकार के समर्थन के बीच शांति की संभावना बनी हुई है। हालांकि, इस शांति प्रक्रिया को कायम रखने के लिए राजनीतिक सहयोग और सतर्कता आवश्यक है।
