Premanand Maharaj On Love Marriage: आज के समय में प्रेम विवाह एक सामान्य विषय बन चुका है, लेकिन इसके साथ ही यह भी सवाल उठता है कि यदि बच्चे प्रेम विवाह करना चाहें तो माता-पिता को क्या करना चाहिए? इस विषय पर वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने अपने सत्संगों और वीडियो संदेशों में कई महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं।
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प्रेमानंद महाराज की राय…
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, यदि बच्चे प्रेम विवाह करना चाहते हैं, तो माता-पिता को उनका साथ देना चाहिए, लेकिन यह ध्यान रखते हुए कि कहीं वे अनजाने में कोई गलती तो नहीं कर रहे हैं। वे कहते हैं, “बच्चे बुद्धिमान तो हैं, लेकिन उनमें सत्य-असत्य का निर्णय लेने वाले विवेक की कमी है।”

माता-पिता की जिम्मेदारी…
माता-पिता को चाहिए कि वे दोनों पक्षों की सही जांच करें। यदि दोनों का आचरण अच्छा है और वे एक-दूसरे के प्रति समर्पित हैं, तो कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। वे यह भी कहते हैं, “माता-पिता को बच्चों का साथ देना चाहिए, यह ध्यान रखते हुए कि कहीं वे अनजाने में भूल तो नहीं कर रहे हैं।”
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वासना और छल से बचें…
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि प्रेम विवाह वासना या छल-कपट में फंसकर नहीं करना चाहिए। ऐसे रिश्ते कुछ समय बाद टूट जाते हैं और उनमें कड़वाहट आ जाती है। वे कहते हैं, “प्रेम विवाह के कई मामलों में हिंसात्मक घटनाएं तक देखी गई हैं।”
खुलकर संवाद की आवश्यकता…
माता-पिता को बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए और उनके विचारों को समझने का प्रयास करना चाहिए। प्रेमानंद महाराज कहते हैं, “आजकल के कई बच्चे बिना माता-पिता की बात सुने निर्णय लेते हैं, जिससे वे भविष्य में दुखी रहते हैं।”
शास्त्रों और धर्म का पालन…
प्रेमानंद महाराज का मानना है कि विवाह माता-पिता की आज्ञा, धर्म और शास्त्रों को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए। वे कहते हैं, “माता-पिता को बच्चों का साथ देना चाहिए, यह ध्यान रखते हुए कि कहीं वे अनजाने में भूल तो नहीं कर रहे हैं।”
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, यदि बच्चे प्रेम विवाह करना चाहते हैं, तो माता-पिता को उनका साथ देना चाहिए, लेकिन यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे विवेकपूर्ण निर्णय ले रहे हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों से खुलकर बात करें, दोनों पक्षों की जांच करें और शास्त्रों और धर्म का पालन करते हुए निर्णय लें। इस प्रकार, प्रेम विवाह को एक सकारात्मक दिशा में मार्गदर्शन किया जा सकता है।
