प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा अनिश्चितकाल तक स्थगित, भक्त बोले—राधा रानी कृपा करें!
premanand maharaj health update: क्या हुआ है?
premanand maharaj health update: संत प्रेमानंद महाराज, जिनके प्रवचनों से लाखों युवा जीवन बदल चुके हैं, की सेहत इन दिनों बेहद नाज़ुक बनी हुई है। अब हर दिन डायलिसिस हो रही है उनकी प्रसिद्ध पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है वृंदावन के केली कुंज आश्रम ने आधिकारिक सूचना जारी की है।
premanand maharaj health update: बीमारी क्या है?
संत प्रेमानंद महाराज को है Polycystic Kidney Disease (PKD) – यह एक अनुवांशिक बीमारी है जिसमें किडनियों में धीरे-धीरे सिस्ट बनने लगते हैं और किडनी फेल हो जाती है। 2006 में पेट दर्द की शिकायत पर बीमारी का पता चला। तब से धीरे-धीरे स्थिति बिगड़ती गई, अब हालत यह है कि कभी हफ्ते में 3-5 बार डायलिसिस होती थी अब हर दिन डायलिसिस जरूरी हो गई है डायलिसिस का इंतज़ाम घर (सोसाइटी फ्लैट) में ही किया गया है।
डायलिसिस की व्यवस्था कैसी है?
संत प्रेमानंद महाराज श्रीकृष्ण शरणम् सोसाइटी (वृंदावन) में रहते हैं , दो फ्लैट्स: HR-1 ब्लॉक में 209 और 212 हैं, एक फ्लैट में रहते हैं, दूसरे में डायलिसिस मशीन और मेडिकल स्टाफ रहता है। हर दिन 4-5 घंटे तक की डायलिसिस प्रक्रिया चलती है और इस दौरान 6 डॉक्टरों की टीम मौजूद रहती है
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premanand maharaj health update: पदयात्रा क्यों बंद हुई?
प्रेमानंद महाराज रोज़ रात 2 बजे श्रीकृष्ण शरणम् से रमणरेती स्थित केली कुंज आश्रम तक 2 किमी पैदल जाते थे पदयात्रा में रोज़ 20 हजार से लेकर लाखों तक भक्त जुटते थे तीन दिन तक नहीं निकले, भक्त इंतज़ार में खड़े रहे 3 दिन बाद आश्रम ने स्पष्ट किया कि अब अनिश्चितकाल तक पदयात्रा बंद रहेगी

भक्तों की प्रतिक्रिया
रवि दत्त (पलवल, हरियाणा)
बाबा के दर्शन से मेरी शराब की लत छूट गई। आज सब कुछ ठीक चल रहा है। सुनकर आंखों से आंसू बह गए।
मनोज (आगरा)
रविवार को मथुरा आया था, दर्शन नहीं हो पाए। राधा रानी से प्रार्थना है कि महाराज जल्दी ठीक हों।
प्रेमानंद महाराज की दिनचर्या (जब स्वस्थ हों)
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| रात 2 बजे | श्रीकृष्ण शरणम् से पैदल आश्रम की यात्रा |
| सुबह | प्रवचन और साधना |
| दोपहर | विश्राम और डायलिसिस (अब रोज़ाना) |
| शाम | संध्या साधना, भजन |
आध्यात्मिक जीवन
संत प्रेमानंद ने पहले काशी में शिव भक्ति करते थे, किडनी की बीमारी के बाद आए वृंदावन फिर राधा नाम जप शुरू किया। अपनी दोनों किडनियों को नाम दिए: राधा और कृष्ण। आज लाखों युवाओं को संस्कार, संयम और भक्ति का मार्ग दिखाया ।

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