प्रयागराज दलित नाबालिग कन्वर्जन की साज़िश – जिहाद ट्रेनिंग फेल
प्रयागराज का नाम अक्सर कमजोरी या गरीबी जैसी समस्याओं से जुड़कर सामने आता रहा है। लेकिन जब दलित नाबालिग से जुड़ी आतंकी साज़िश का खुलासा हुआ, तो यह पूरे देश को हिलाकर रख गया। एक ब्रेनवॉश और जिहाद ट्रेनिंग की दहशत ने समाज में सवाल खड़े कर दिए। जानिए कैसे एक मासूम लड़की को दिल्ली‑केरल तक ले जाकर कट्टरपंथ की ट्रेनिंग दी गई और कैसे पुलिस की सतर्कता ने बड़ी साजिश को विफल कर दिया।
घटना की शुरुआत: 8 मई से गायब, फरार भीड़
28 जून को फूलपुर थाना प्रभारी कुलदीप सिंह गुनावत की टीम को एक गंभीर शिकायत मिली — 15 वर्षीय दलित नाबालिग बेटी शादी में गई थी, लेकिन लौट कर नहीं आई। जब मां ने फोन किया, तो बेटी बोली, “मम्मी, कहकशा बानो मुझे केरल ले गई है।” ये पहली इत्तला थी एक भयानक साज़िश की।
दिल्ली–केरल तक साज़िश का सफर
- ब्रेनवॉश और बहला-फुसलाकर अपहरण: पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों मोहम्मद कैफ और कहकशा बानो ने नाबालिग को पैसों की आड़ में बहलाया। पहले दिल्ली ले गई, जहां कैफ ने छेड़खानी भी की।
- केरल में जिहाद ट्रेनिंग: ट्रेनिंग कैंप में लड़की को कट्टरपंथी वीडियो दिखाए गए और कहकशा ने उसे धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया। धमकी देते हुए “जिहाद” में शामिल होने को कहा गया।
- भागकर खुद बची: डर से लड़खड़ाने के बाद उसने रेलवे पुलिस की मदद से भाग निकली। CWC और स्थानीय पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की।
पुलिस की सतर्कता: तीन टीमें, एक मिशन
- तीन‑टीम स्ट्रटेजी: डीसीपी गंगानगर जोन कुलदीप का कहना है कि यह संगठित गिरोह है, जो दलित नाबालिगों को धार्मिक कट्टरता में फंसाकर आतंकवाद से जोड़ता है।
- वन‑स्टॉप सेंटर में सुरक्षा: नाबालिग को वन‑स्टॉप सेंटर में रखा गया है जहां उसे मनोवैज्ञानिक सहायता दी जा रही है।
- आरोपियों की गिरफ्तारी: मोहम्मद कैफ और कहकशा बानो को गिरफ्तार किया गया, दोनों के खिलाफ IPC की धारा 363, 366, और 506 सहित पुरी कारवाई शुरू।
परिवार की भय और पुलिस का बचाव
पीड़िता ने कहा कि “मम्मी, मुझे बचा लो”—और इसी दरम्यान उसने तमाम खतरे झेले, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। थाने में दी गई तहरीर में बताया गया कि “आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी”। अब पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है।
सामाजिक और कानूनी निहितार्थ
- सांप्रदायिक राजनीति पर सवाल: दलित बच्चियों को बहला-फुसलाकर धार्मिक कट्टरता में फंसाने का यह खुला प्रयास कितना खतरनाक और संगठित है?
- राजनीतिक विपक्ष और उछले सवाल: कई मानवाधिकार स्थानीय और राष्ट्रीय नेता इस घटना को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं — क्या राज्य की नीतियां पर्याप्त नहीं?
- कोर्ट और पुलिस जांच आगे: घटना में शामिल अन्य सदस्यों की पहचान और पूरे गिरोह का भंडाफोड़ अब प्राथमिकता बनी है।
आगे क्या होगा?
- मासूम को सुरक्षा एवं मदद मिल रही है।
- गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश व गिरफ्तारी जारी है।
- रख‑रखाव और न्यायिक प्रक्रिया की क्रिया शुरू हो चुकी है—कानून का रास्ता चलता रहेगा।
प्रयागराज से केरल जाने वाली यह साज़िश एक अलार्म है—जब समाज की सबसे कमजोर लड़कियों को कट्टरपंथी एजेंट्स का निशाना बनाया जाता है। पर कानून और मानवता की जीत तब होती है जब हम समय रहते सच को जानते हैं और सशक्त कार्रवाई करते हैं। अभी भी वक्त है—सशक्त चेतना और सुरक्षात्मक कदम सरकार, जनता और समाज की जिम्मेदारी है।
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