पूर्व पीएम देवगौड़ा के पोते का जेल में यह अनोखा काम ?

यह कहानी है एक ऐसे युवा की, जिसे अपने कृत्यों की कीमत चुकानी पड़ी। और यह सिर्फ कोई और नहीं, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना की है। क्या किसी को यह विश्वास हो सकता है कि एक नामी राजनीतिक परिवार का सदस्य अचानक जेल में किसी लाइब्रेरी का काम करने पर मजबूर हो जाएगा?
जेल में क्या काम मिला रेवन्ना को?
यह कहानी किसी फिल्म के सीन से कम नहीं लगती, लेकिन यह सच है। रेवन्ना, जो हाल ही में कर्नाटक के सेक्स स्कैंडल में अपनी संलिप्तता को लेकर चर्चा में आए थे, अब बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में लाइब्रेरी के काम में हाथ बंटाएंगे। उन्हें रोजाना किताबें वितरित करने और उनका रिकॉर्ड रखना होगा। यह काम ना सिर्फ उनका दायित्व बन चुका है, बल्कि अब उनकी रोज़ की मज़दूरी ₹522 तय की गई है।
लेकिन रेवन्ना के लिए यह लाइब्रेरी का काम कोई सामान्य जिम्मेदारी नहीं है। यह उनके लिए उन कड़ी सच्चाइयों और अफसोसों का सामना करने जैसा है, जिन्हें उन्होंने खुद अपने कृत्यों से पैदा किया। वह केवल किताबों को नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी की बुरी गलती को भी सजा के रूप में भोग रहे हैं।
रेप केस ने बदल दी ज़िंदगी की दिशा
क्या किसी को कभी यकीन हुआ था कि देवगौड़ा परिवार का एक सदस्य यौन उत्पीड़न के मामले में सजा पाएगा? 2023 में, एक महिला ने रेवन्ना पर आरोप लगाया कि उसने उसे धमकियां देकर यौन उत्पीड़न किया। यह कहानी यहीं नहीं रुकी, क्योंकि रेवन्ना के खिलाफ चार रेप केस थे और उस पर 50 से ज्यादा महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोप थे।
एक महिला ने रेवन्ना पर आरोप लगाया था कि उसने 2021 से लेकर कई बार उसके साथ रेप किया और किसी को भी बताने पर वीडियो लीक करने की धमकी दी। इससे पहले, रेवन्ना के सोशल मीडिया पर 2,000 से ज्यादा अश्लील वीडियो क्लिप सामने आए थे। इस सबके बावजूद, रेवन्ना को सज़ा दी गई, लेकिन यह सज़ा उनके परिवार के लिए एक बड़ा झटका थी।
क्या सब कुछ खत्म हो चुका है?
बेशक, रेवन्ना के लिए यह एक कठिन समय है। लेकिन क्या यह सिर्फ उनकी गलती का परिणाम है, या फिर हमारे समाज का एक बड़ा सवाल भी है? क्या उन जैसे लोग अपनी गलती सुधारने के बाद कभी अपने परिवार और समाज के सामने खड़ा हो सकते हैं?
जेल में लाइब्रेरी का काम उनके लिए अब एक मौका हो सकता है, लेकिन यह समाज की ओर से भी एक संकेत है कि हम सभी को जिम्मेदार ठहराए जाते हैं। उनका अब जेल के भीतर बिताया हर दिन उन्हें अपनी गलती की सजा तो देगा ही, साथ ही समाज को यह भी सिखाएगा कि गलतियाँ स्वीकार करना और उन्हें सुधारना किसी भी इंसान के जीवन का एक हिस्सा होना चाहिए।
नैतिकता और सजा के बीच एक संतुलन
यह कहानी केवल रेवन्ना की नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में ऐसी घटनाओं को लेकर एक गहरी बहस भी है, जो परिवार, राजनीतिक या आर्थिक स्थिति से ऊपर हैं। हमारी व्यवस्था में सजा का मतलब केवल दंड नहीं होता, बल्कि यह एक अवसर भी है अपनी गलतियों को समझने और सुधारने का।
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