Pralay Missile Salvo Test: सुबह के करीब साढ़े दस बजे ओडिशा के तट पर चांदीपुर की हवा में अचानक हलचल बढ़ी और कुछ ही पलों में भारत की स्वदेशी मिसाइल क्षमता ने एक और मजबूत कदम दर्ज कर लिया. DRDO ने प्रलय मिसाइल का ऐसा परीक्षण किया, जिसने रणनीतिक दुनिया का ध्यान खींच लिया ।
Pralay Missile Salvo Test: क्या है इस टेस्ट की खास बात?
इस बार बात सिर्फ एक मिसाइल की नहीं थी, एक ही लॉन्चर से बैक-टु-बैक दो मिसाइलें दागी गईं—यानी सल्वो लॉन्च, यह क्षमता दिखाती है कि सिस्टम दबाव में भी तेज़ और सटीक प्रतिक्रिया दे सकता है. ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में लगाए गए उन्नत सेंसरों ने उड़ान के हर पल पर नज़र रखी । रक्षा मंत्रालय के मुताबिक परीक्षण अपने सभी मानकों पर खरा उतरा. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, प्रलय का यह परीक्षण भारत की सामरिक मिसाइल क्षमता के लिए एक अहम मील का पत्थर है ।
Pralay Missile Salvo Test: प्रलय मिसाइल: ताकत, रफ्तार और स्वदेशी तकनीक
प्रलय एक शॉर्ट-रेंज, क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी रफ्तार करीब 7500 किमी/घंटा बताई जाती है और यह लगभग 1000 किलोग्राम तक का वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी पहचान है मेक इन इंडिया। डिज़ाइन से लेकर डेवलपमेंट तक, प्रलय को DRDO ने देश में ही तैयार किया है ।
पहले भी हो चुकी है परीक्षा
यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले 28–29 जुलाई को भी ओडिशा तट के पास इसके यूज़र इवैल्यूएशन ट्रायल सफल रहे थे. जिनमें सेना और वायुसेना की जरूरतों के मुताबिक इसकी उपयोगिता परखी गई थी.
क्यों अहम है यह उपलब्धि?
आज के बदलते सुरक्षा परिदृश्य में तेज़, भरोसेमंद और सटीक प्रतिक्रिया सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। सल्वो लॉन्च जैसी क्षमताएँ न सिर्फ तकनीकी आत्मविश्वास बढ़ाती हैं, बल्कि रणनीतिक संतुलन को भी मजबूती देती हैं ।
