बेटियों को दिया अधिकार
इस मॉडल की सबसे खास बात यह है कि जिलाधिकारी अस्मिता लाल की पहल पर इन कार्यक्रमों में प्रशासन और खाप पंचायतों की साझेदारी नजर आ रही है। जो राज्य में अपनी तरह का अनोखा प्रयोग है। इनका उद्देश्य बेटियों को केवल संरक्षण देने के अलावा समान अवसर और सामाजिक स्वीकृति दिलाना भी है।

ये है वो 9 योजनाएं
1. निरा मुहिम :
बागपत की जिलाधिकारी ने बताया कि निरा योजना के तहत बालिकाओं और महिलाओं को फ्री कॉटन रियूजेबल सेनेट्री पैड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ये पैड 2 से ढाई साल तक यूज किए जा सकते हैं और पूरी तरह रीसाइकिल योग्य हैं।
2. बेटी का नाम घर की शान:
घरों के बाहर बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगाई जा रही हैं। ग्राम प्रधान, कर्मचारियों, मीडिया और आमजन को इस अनोखी मुहिम से जोड़ा गया।
3. मेरी बेटी मेरी कुल दीपक:
UP में उन परिवारों को सम्मानित किया जा रहा है, जिनकी एक या 2 बेटियां हैं। बेटियों को उपहार देकर यह मैसेज दिया जा रहा है कि अच्छे संस्कार और मौका मिलें तो बेटियां समाज का उजाला बनती हैं।
4. हर बेटी का सम्मान :
मिशन शक्ति 5.0 के तहतसभी प्रमुख खाप पंचायतों ने दहेज, ऑनर किलिंग और भ्रूण हत्या के खिलाफ एकजुट होने का संकल्प लिया। कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक लगाने और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कई अल्ट्रासाउंड केंद्रों के लाइसेंस निलंबित कर मशीनें जब्त की गई।
5. बुनकर महिलाएं :
बुनकर महिलाओं को योजनाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे पारंपरिक हुनर को नया बाजार मिल रहा है और महिलाएं पहचान बना रही हैं।
6. ‘कन्या जन्मोत्सव’:
Power of Nine Goddesses Schemes:‘कन्या जन्मोत्सव’ की शुरुआत की गई। इसके तहत नवजात के जन्म पर जन्म प्रमाण पत्र, बेबी किट, मोरिंगा का पौधा और एक सुंदर बेबी स्वैडल भेंट किया जाएगा। साथ ही, हॉस्पिटल में ही बालिका को सुमंगला योजना सहित उन सभी सरकारी योजनाओं में तुरंत नामांकित किया जाएगा, जिनकी वह पात्र है।
7. सांस अभियान :
इस अभियान के तहत स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे नवजात के उपचार में सुधार हुआ है।
8. कार्यस्थल पर महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा:
महिलाओं को कार्यस्थल पर उत्पीड़न से बचाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। महलाओं को भरोसा दिया जा रहा है कि उनकी सुरक्षा और गरिमा का पूरा सम्मान होगा।
Power of Nine Goddesses Schemes: 9. किशोरी का पिटारा:
इसका उद्देश्य किशोरियों से जुड़े उन मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना है, जिनके बारे में वे खुलकर सवाल पूछने में सहज नहीं होतीं। इस पहल के तहत लड़कियां अपने सवाल कागज पर लिखकर एक बॉक्स में डालेंगी। इसके बाद प्रशिक्षित काउंसलर पर्ची निकालकर उन सवालों के जवाब वैज्ञानिक तरीके से देंगे।
