PoK Human Rights Crisis: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हाल ही में शुरू हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों ने एक गंभीर मानवाधिकार संकट को जन्म दे दिया है। स्थानीय नागरिकों द्वारा बुनियादी जरूरतों पर सब्सिडी कटौती के विरोध में किए जा रहे प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने 25 सुरक्षाबलों को बंधक बना लिया है। ये जवान अब मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिससे सुरक्षा बल किसी भी प्रकार की सीधी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि सरकार उनकी मौलिक अधिकारों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने अब तक सरकार के सामने 38 मांगें रखी हैं। इन मांगों में PoK में 12 रिजर्व सीटें खत्म करने की भी बात शामिल है। आंदोलनकारी दावा कर रहे हैं कि यह प्रदर्शन केवल मौलिक अधिकार और बुनियादी सुविधाओं की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि खुफिया एजेंसियां आंदोलन को तोड़ने के लिए गुप्त हमले कर रही हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि सादे कपड़ों में आए अज्ञात लोग नेताओं को निशाना बनाते हैं और भीड़ में अफरातफरी फैलाते हैं। चार दिन तक जारी इस आंदोलन में अब तक 10 लोग मारे जा चुके हैं और 100 से अधिक घायल हुए हैं।

PoK Human Rights Crisis: पत्रकारों पर पाबंदी
PoK में वर्तमान स्थिति में पत्रकारों की एंट्री पर पाबंदी लगाई गई है। यह कदम स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे वास्तविक स्थिति की रिपोर्टिंग बाधित हो रही है। इस प्रकार के नियंत्रण से पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की सही तस्वीर जनता और दुनिया तक नहीं पहुंच पा रही।

भारत का सख्त रुख
भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शन और पाकिस्तान सेना द्वारा नागरिकों पर की जा रही बर्बर कार्रवाई के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि PoK पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा और दमनकारी नीतियां ही आज पीओके की जनता की पीड़ा की मुख्य वजह हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि PoK के विभिन्न इलाकों से आम नागरिकों पर पाकिस्तानी बलों द्वारा की जा रही ज्यादतियों की लगातार खबरें आ रही हैं। स्थानीय संसाधनों का शोषण और जनता पर जबरदस्ती थोपे गए फैसलों के खिलाफ उठ रही आवाज को पाकिस्तान बर्बर तरीके से दबाने की कोशिश कर रहा है।
भारत ने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान को इन मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि PoK पर पाकिस्तान का कब्जा पूरी तरह अवैध और जबरन है।

PoK Human Rights Crisis: PoK में पहले भी हुए प्रदर्शन
PoK में यह पहला मौका नहीं है जब नागरिकों ने पाकिस्तान की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। इतिहास में कई बार स्थानीय लोगों ने अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन किए हैं। प्रत्येक बार, पाकिस्तान की सेना ने इन्हें दबाने के लिए सैन्य बल का उपयोग किया है।
हालिया प्रदर्शन में स्थानीय राजनीतिक दलों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि UN को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और PoK की जनता को पाकिस्तानी सेना के अत्याचार से बचाना चाहिए। 29 सितंबर से जारी प्रदर्शन में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है।

स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
PoK में मानवाधिकार संकट अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है। स्थानीय राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की है कि वे PoK में तत्काल हस्तक्षेप करें।
भारत ने भी कहा है कि PoK में नागरिकों पर की जा रही ज्यादतियों के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि PoK में इस तरह की घटनाएं स्थानीय अस्थिरता बढ़ा सकती हैं और क्षेत्रीय शांति पर भी असर डाल सकती हैं।
10-10 रुपये में बेची जा रही पाक सेना की वर्दी
POK में बवाल के बीच एक वीडियो सामने आया है, जिसमें पाक सेना की वर्द, हेलमेट और अन्य सामान 10-10 रुपये में बेचा जा रहा है। यह वीडियो विरोध स्थल का बताया जा रहा है।
#POK में जनता का ग़ुस्सा फूट पड़ा 🔥
पाकिस्तानी फोर्सेज़ की वर्दी, हेलमेट और शील्ड अब ₹10 की सेल पर! 😂जिस आर्मी को अपने ही लोग इस तरह नीलाम करें, सोचो दुश्मन क्या हाल करेंगे 🤦♂️#POK #PakistanArmy #Roast #breakingnews pic.twitter.com/IMb7eFQdUN
— Mritunjay Kumar (@Mritunjayrocks) October 3, 2025
