मोदी जी ने दिया 10-10 हजार का तोहफा!
PM Narendra Modi-Bihar Mahila Rojgar Yojana 2025: जब जिंदगी मुश्किलों से घिरी हो, तब एक छोटी सी उम्मीद की किरण भी किसी चमत्कार से कम नहीं होती। और वही उम्मीद आज बिहार की 75 लाख महिलाओं के लिए सच हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ की शुरुआत कर 75 लाख महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये सीधे ट्रांसफर किए। यह कोई मामूली पैसा नहीं, बल्कि उन बहनों के लिए सशक्तिकरण की नई शुरुआत है, जो अपनी मेहनत और जज्बे से हर दिन दुनिया से लड़ती हैं।

एक शुरुआत, जो बदल सकती है जीवन
सोचिए, एक महिला जिसके पास रोजमर्रा के खर्च तक का इंतजाम नहीं, उसे अचानक 10 हजार रुपए मिल जाएं। ये पैसे न केवल उसके लिए जरूरी सामान खरीदने का सहारा होंगे, बल्कि उसकी उम्मीदों को भी एक नई उड़ान देंगे। बिहार के 3.39 करोड़ महिला वोटर्स में से करीब 22% महिलाओं को इस योजना से फायदा मिला है। ये महिलाएं सिर्फ आंकड़े नहीं, हमारी बहनें, मांएं, बेटियां हैं जिनकी आवाज़ अब गूंज उठी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि जन-धन योजना ने माताओं-बहनों के लिए बैंक खाते खुलवाकर एक ऐसा रास्ता बनाया, जहां से पैसा सीधे उनके हाथों तक पहुंचता है। पहले तो यह पैसा बीच में कहीं लुप्त हो जाता था, लेकिन अब हर पैसा पूरा और सही जगह पहुंच रहा है। उन्होंने बड़े प्यार से यह भी कहा, “एक भाई तभी खुश होता है, जब उसकी बहन स्वस्थ और परिवार खुशहाल हो।”
बिहार की जीविका दीदियों से हुई खास मुलाकात
कार्यक्रम के दौरान भोजपुर की रीता देवी और नूर जहां खातून जैसे जीविका दीदियों ने भी अपनी ज़िंदगियों की झलक दी। उनकी कहानियां सुनकर पीएम मोदी खुद मुस्कुराए और उनकी तारीफ करते नहीं थके। रीता देवी की उत्साह से भरी बातों ने वहां मौजूद सभी को प्रेरित किया।
ऐसे छोटे-छोटे पल हमें याद दिलाते हैं कि सरकार की ये पहल कितनी असली और ज़रूरी है। ये महिलाएं सिर्फ पैसे पाने की उम्मीद नहीं रखतीं, वे खुद को मजबूत बनाने और समाज में बराबरी का दर्जा पाने का सपना देखती हैं। और ये योजना उसी सपने को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
नीतीश कुमार का सशक्त और सीधा संदेश
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस मौके पर अपनी बात रखते हुए बिहार के पिछले अंधकारमय दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों के समय महिलाओं और आम जनता को कितना दर्द सहना पड़ता था। सड़कें टूटी थीं, पुल-पुलिया खस्ताहाल थे, और नक्सली आतंक ने हर तरफ भय का माहौल बना रखा था।
उनकी आवाज़ में जो दृढ़ता थी, वह बताती है कि बिहार ने सच में कितना बड़ा बदलाव देखा है। अब बेटियां बेखौफ घरों से निकल रही हैं, स्कूलों में पढ़ रही हैं, और अपने सपनों को पूरा कर रही हैं। नीतीश जी ने लालू यादव की पारिवारिक राजनीति की आलोचना करते हुए साफ कहा कि बिहार की सरकार जनता के लिए काम करती है, परिवार के लिए नहीं।
उम्मीदों का नया सूरज
यह योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास को भी बढ़ा रही है। आज जब इन 75 लाख महिलाओं के खाते में रकम आई है, तो यह सिर्फ पैसा नहीं बल्कि सम्मान, स्वाभिमान और नई उम्मीदों की सौगात है।
इससे उनका जीवन बदलने लगेगा। बच्चे स्कूल जाएंगे, परिवार की तकलीफें कम होंगी, और सबसे बड़ा बदलाव होगा समाज में महिलाओं की भागीदारी और उनकी आवाज़ का। ये बहनें अब सिर्फ अपने परिवार की नहीं, पूरे बिहार की ताकत बनेंगी।
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