प्रधानमंत्री मोदी का दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 11 सितंबर 2025 का उत्तराखंड दौरा विशेष रूप से आपदा प्रभावित क्षेत्रों पर केंद्रित है। सुबह वाराणसी में मॉरीशस के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद, दोपहर करीब 4:15 बजे वे जौलीग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून पहुंचेंगे। यहां से वे हेलीकॉप्टर द्वारा उत्तरकाशी और चमोली जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। इसके बाद, एयरपोर्ट पर ही अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक होगी, जिसमें राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों की प्रगति पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री का यह दौरा राज्य सरकार की मांग पर आधारित है, जिसने केंद्र से 5,702.15 करोड़ रुपये की विशेष सहायता मांगी है।

आपदा का लेंगे जायजा
प्रधानमंत्री क्यों जा रहे हैं? इसका सीधा जवाब है—आपदा प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेना और राहत कार्यों को गति देना। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि पीएम का दौरा प्रभावितों का मनोबल बढ़ाएगा। केंद्र सरकार ने पहले ही एनडीआरएफ, आईटीबीपी और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की हैं। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, “उत्तराखंड की आपदा से दुखी हूं। केंद्र हरसंभव मदद करेगा।” यह दौरा न केवल क्षति का आकलन करेगा, बल्कि भविष्य के लिए आपदा प्रतिरोधी योजनाओं पर भी फोकस करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, हवाई सर्वेक्षण से जीएलओएफ और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान आसान होगी। इसके अलावा, पीएम स्थानीय लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनेंगे, जो राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को मजबूत करेगा।
PM Modi Uttarakhand visit: CM धामी का निरीक्षण
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीएम के दौरे की तैयारियों के लिए 10 सितंबर 2025 को जौलीग्रांट एयरपोर्ट का निरीक्षण किया। उन्होंने एयरपोर्ट निदेशक और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की, जहां सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और समन्वय पर चर्चा हुई। धामी ने कहा, “पीएम के दौरे को सफल बनाने के लिए सभी व्यवस्थाएं समयबद्धता के साथ सुनिश्चित की जाएं। हवाई सर्वेक्षण के लिए हेलीकॉप्टर की उपलब्धता, मीटिंग हॉल की तैयारी और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दें।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई चूक न हो, क्योंकि यह न केवल आपदा प्रबंधन का मुद्दा है, बल्कि राज्य की छवि का भी।
धामी ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री का उत्तराखंड से विशेष लगाव है। उनकी निगरानी में राहत कार्य तेज होंगे।” यह निरीक्षण राज्य सरकार की सक्रियता को दर्शाता है, जो केंद्र-राज्य सहयोग का प्रतीक है। एयरपोर्ट पर ट्रैफिक मैनेजमेंट, मेडिकल सुविधाएं और मीडिया सेंटर की व्यवस्था भी चेक की गई। धामी ने जोर दिया कि पर्यावरण-अनुकूल उपाय अपनाएं, ताकि हिमालयी पारिस्थितिकी सुरक्षित रहे।

उत्तराखंड में तबाही
मानसून की शुरुआत जून 2025 में हुई, लेकिन जुलाई-अगस्त में बारिश ने विकराल रूप धारण कर लिया। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, उत्तराखंड में सामान्य से 30-40% अधिक वर्षा दर्ज की गई, जो पश्चिमी विक्षोभ और जलवायु परिवर्तन का परिणाम थी। इसने राज्य के नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित किया। अप्रैल से अगस्त 2025 तक की आपदाओं में 81 लोगों की मौत हो चुकी थी, 114 घायल हुए और 94 लापता थे। कुल मिलाकर, पिछले 10 वर्षों में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से 705 मौतें हुईं, जो राज्य के लिए एक चेतावनी है। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिससे ग्लेशियर झील आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अनियोजित विकास और वनों की कटाई ने इन आपदाओं को और घातक बना दिया।
उत्तराखंड में बाढ़, बादल फटे
उत्तराखंड की आपदाएं मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में केंद्रित रहीं, जहां नदियां और नाले उफान पर आए। अगस्त 2025 में आई घटनाओं ने राज्य को हिला दिया।
PM Modi Uttarakhand visit: धराली का विनाश
उत्तरकाशी जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा। 5 अगस्त 2025 को धराली गांव (हर्षिल घाटी) में बादल फटने से भीषण फ्लैश फ्लड आया। खीर गंगा नदी उफान पर आ गई, जिससे कीचड़ और मलबे की लहर ने गांव को निगल लिया। मीडिया ने इसे क्लाउडबर्स्ट बताया, लेकिन विशेषज्ञ जीएलओएफ या ग्लेशियर ढहने की संभावना जता रहे हैं। कम से कम 5 मौतें हुईं, 50 से अधिक लापता। 190 लोगों को बचाया गया, लेकिन एक अस्थायी झील बनी, जो आगे खतरा पैदा कर रही थी। हर्षिल-धराली मार्केट पूरी तरह तबाह, जहां दुकानें, होटल और सेना कैंप ध्वस्त हो गए। चार धाम यात्रा प्रभावित हुई, गंगोत्री धाम का संपर्क कटा। जून 2025 में यमुनोत्री हाईवे पर भी क्लाउडबर्स्ट से 2 मजदूर मारे गए, 7 लापता। कुल नुकसान: सैकड़ों घर, सड़कें (ब्रह्म कमल मार्ग) और पुल क्षतिग्रस्त। पशुधन में 3,953 की मौत।
चमोली जिले में भूस्खलन और बाढ़
चमोली में थराली क्षेत्र भूस्खलन का शिकार हुआ। भारी बारिश से अलकनंदा नदी बाढ़ग्रस्त हो गई, जिससे गांवों में जलभराव। 10 से अधिक मौतें, दर्जनों लापता। जुलाई-अगस्त में आई बारिश ने जसलोक-मलारी सड़क को क्षतिग्रस्त किया। जॉशिमठ के पास भूस्खलन से सैकड़ों यात्री फंस गए। नुकसान: 238 पक्के और 2 कच्चे घर नष्ट, 2,835 पक्के और 402 कच्चे घर क्षतिग्रस्त। बिजली लाइनें (2,838) और जल आपूर्ति योजनाएं (509) प्रभावित।
अन्य जिलों में आपदाएं
पौड़ी गढ़वाल के सैंजी में फ्लैश फ्लड से 5 मौतें। बागेश्वर के कापकोट में क्लाउडबर्स्ट से नाले उफान पर, 10 घर बह गए। अल्मोड़ा और नैनीताल में भूस्खलन से सड़कें बंद। देहरादून घाटी में यमुना नदी बाढ़ग्रस्त। कुल 23 जिलों में प्रभाव, जहां 1,900 गांव प्रभावित। जम्मू-कश्मीर से सटे क्षेत्रों में भी असर।
नुकसान का आकलन

राहत और पुनर्वास प्रयास
राहत कार्य तुरंत शुरू हुए। एनडीआरएफ की 7 टीमें, आईटीबीपी की 3, एसडीआरएफ सक्रिय। वायुसेना ने Mi-17 हेलीकॉप्टर तैनात। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीएम धामी से बात की, सहायता का आश्वासन दिया। पीएम मोदी ने शोक व्यक्त किया। स्थानीय स्तर पर ब्रो ने सड़कें बहाल कीं। पुनर्वास के लिए अस्थायी आश्रय, भोजन वितरण। भविष्य में रडार सिस्टम और अलर्ट सिस्टम मजबूत होंगे।
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प्रकृति जब अपना रूप दिखाती है, तो उसका सामना करना बेहद मुश्किल हो जाता है। खासकर तब जब ये असमय बाढ़, लैंडस्लाइड या बादल फटने जैसी आपदाओं के रूप में सामने आती है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में आई भारी बारिश ने दो राज्यों को तबाह कर दिया। इन प्राकृतिक आपदाओं ने न केवल लोगों की ज़िंदगियाँ छीन लीं, बल्कि उनकी उम्मीदों को भी चूर-चूर कर दिया। पूरी खबर…
