Interactions in Tianjin continue! Exchanging perspectives with President Putin and President Xi during the SCO Summit. pic.twitter.com/K1eKVoHCvv
— Narendra Modi (@narendramodi) September 1, 2025
भारत को बड़ी सफलता
SCO समिट के दूसरे दिन, 1 सितंबर 2025 को, तियानजिन घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की गई। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी, जो पाकिस्तान-समर्थित द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) द्वारा अंजाम दिया गया था। घोषणापत्र में कहा गया कि हमले के अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और समर्थकों को न्याय के कठघरे में लाना आवश्यक है। यह निंदा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति में की गई, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता थी।

आतंकवाद की कड़ी निंदा
PM Modi SCO terrorism: भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने समिट से पहले ही घोषणापत्र में क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद की कड़ी निंदा सुनिश्चित करने के लिए अन्य सदस्य देशों के साथ काम किया था। यह सफलता जून 2025 में किंगदाओ में SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत की नाराजगी के बाद आई, जहां पहलगाम हमले का जिक्र न होने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। उस बैठक में बालोचिस्तान में जफर एक्सप्रेस अपहरण का उल्लेख था, लेकिन पहलगाम का नहीं, जिसे भारत ने पाकिस्तान-समर्थित आतंकवाद की अनदेखी माना।
PM @narendramodi addressed the 25th Meeting of the Council of Heads of State of the Shanghai Cooperation Organization (SCO), held in Tianjin, China.
PM highlighted 🇮🇳’s approach to strengthening cooperation under the SCO framework & sought greater action under three pillars–… pic.twitter.com/epXYKo7sYp
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 1, 2025
यह घोषणापत्र SCO के मूल सिद्धांतों—आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई—को मजबूत करता है। भारत ने हमेशा जोर दिया है कि SCO को आतंकवाद पर दोहरी मानदंड अपनाने नहीं देना चाहिए। इस सफलता से भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को वैश्विक मंच पर मान्यता मिली, जो उसके ‘शून्य सहिष्णुता’ नीति को मजबूत करती है।
भारत की नाराजगी और इनकार
जून 2025 में किंगदाओ में SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक पहलगाम हमले के ठीक बाद हुई, जिसमें भारत ने संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दस्तावेज में आतंकवाद, विशेष रूप से क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद का उल्लेख नहीं था, जबकि बालोचिस्तान में जफर एक्सप्रण अपहरण का जिक्र था। सिंह ने जोर दिया कि “आतंकवाद, कट्टरपंथ और चरमपंथ क्षेत्रीय शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं” और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराना जरूरी है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बाद में कहा कि भारत ने आतंकवाद पर संदर्भ चाहा, लेकिन “एक सदस्य देश” (पाकिस्तान का इशारा) ने अस्वीकार कर दिया। SCO के सहमति-आधारित ढांचे में यह असहमति संयुक्त बयान को असंभव बना दिया। भारत ने इसे “दोहरी मानदंड” का उदाहरण बताया, जहां पाकिस्तान-समर्थित आतंक को नजरअंदाज किया गया।
आतंकवाद के समर्थन की छूट क्यों?
प्रधानमंत्री मोदी ने समिट के पूर्ण सत्र में आतंकवाद को “मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा” बताया। उन्होंने कहा,
“कुछ देशों को आतंकवाद का खुला समर्थन क्यों? भारत चार दशक से आतंकवाद झेल रहा है। पहलगाम हमला न केवल भारत की आत्मा पर प्रहार था, बल्कि मानवता पर चुनौती था।” मोदी ने जोर दिया कि “आतंकवाद पर कोई दोहरी मानदंड स्वीकार्य नहीं” और SCO को एकजुट होकर लड़ना चाहिए।
Sharing my remarks during the SCO Summit in Tianjin. https://t.co/nfrigReW8M
— Narendra Modi (@narendramodi) September 1, 2025
“कुछ देश आतंकवाद को शरण देते हैं”
उन्होंने पाकिस्तान का अप्रत्यक्ष संदर्भ देते हुए कहा कि “कुछ देश आतंकवाद को नीति का साधन बनाते हैं और आतंकियों को शरण देते हैं।” मोदी ने पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया, जहां भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमला किया। यह बयान शहबाज शरीफ की मौजूदगी में दिया गया।
मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बातचीत
मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बैठक समिट के बाद हुई, जहां दोनों ने रक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की। पुतिन ने यूक्रेन मुद्दे पर भारत-चीन की भूमिका की सराहना की, कहा कि “भारत और चीन जैसे देश शांति प्रयासों में महत्वपूर्ण हैं।” बैठक में रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव का भी जिक्र था, लेकिन दोनों ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई।Sharing my remarks during meeting with President Putin. https://t.co/PADOdRjsBs
— Narendra Modi (@narendramodi) September 1, 2025
PM Modi SCO terrorism: विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय ने मोदी के संबोधन को “संतुलित और दूरदर्शी” बताया। प्रवक्ता रंधीर जायस्वाल ने कहा कि मोदी ने SCO को “सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर” के तीन स्तंभों पर आधारित बताया। MEA ने जोर दिया कि संबोधन में आतंकवाद पर भारत की स्थिति स्पष्ट थी, जो समिट की सफलता का आधार बनी।
मंत्रालय ने कहा कि मोदी का ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म’ मंत्र SCO के लिए प्रासंगिक है, जो विकास को बढ़ावा देगा।
पुतिन ने यूक्रेन मुद्दे पर भारत-चीन की तारीफ की
समिट में पुतिन ने कहा, “यूक्रेन संकट पर भारत और चीन की संतुलित भूमिका सराहनीय है। दोनों देश बहुपक्षीयता के पक्षधर हैं।” उन्होंने SCO को “नई विश्व व्यवस्था का मॉडल” बताया। यह तारीफ भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मान्यता देती है।
SCO समिट किन वजहों से खास
यह समिट SCO के 25 वर्षों का जश्न था, जिसमें 20 से अधिक देशों के नेता शामिल हुए। यह सबसे बड़ा समिट था, जिसमें ट्रंप टैरिफ के बीच बहुपक्षीयता पर जोर दिया गया। भारत-चीन संबंधों में सुधार, पहलगाम निंदा और आर्थिक सहयोग ने इसे खास बनाया।
SCO में कौन-कौन से देश
सदस्य देशों की सूची
| क्रमांक | देश |
| 1 | चीन |
| 2 | भारत |
| 3 | पाकिस्तान |
| 4 | रूस |
| 5 | कजाकिस्तान |
| 6 | किर्गिस्तान |
| 7 | ताजिकिस्तान |
| 8 | उज्बेकिस्तान |
| 9 | ईरान |
| 10 | बेलारूस |
supervisor: अफगानिस्तान, मंगोलिया। संवाद साझेदार: तुर्की, श्रीलंका, आदि।
पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच बात
मोदी और जिनपिंग ने सीमा शांति, व्यापार और आतंकवाद पर चर्चा की। मोदी ने कहा, “भारत-चीन साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं।” जिनपिंग ने चार सुझाव दिए: रणनीतिक संवाद मजबूत करें, सहयोग बढ़ाएं, आपसी हित सुनिश्चित करें। दोनों ने BRICS 2026 के लिए सहयोग का वादा किया।
इस समिट का क्या महत्व है?
PM Modi SCO terrorism: SCO समिट का महत्व क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक एकीकरण और आतंकवाद विरोध में है। भारत के लिए लाभ: केंद्रीय एशिया से ऊर्जा पहुंच, आतंकवाद पर वैश्विक समर्थन, चीन से संबंध सुधार। वैश्विक स्तर पर, यह ट्रंप टैरिफ के बीच बहुपक्षीयता को मजबूत करता है। भारत को कूटनीतिक जीत मिली, जो क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाएगी। समिट से SCO विकास रणनीति 2035 और पर्यावरण सहयोग जैसे समझौते हुए, जो भारत के विकास मॉडल को बढ़ावा देंगे।
