किसानों के हितों के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हूं: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक भावुक और दृढ़ संकल्प से भरी टिप्पणी की है, जब उन्होंने कहा कि किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों के हितों से समझौता कभी नहीं किया जाएगा। यह बयान उस वक्त आया है जब अमेरिका ने भारतीय कृषि उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया है, जिससे भारतीय उत्पादों के निर्यात पर असर पड़ सकता है।

अपने इस बयान में पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा, “मुझे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी और मैं इसके लिए तैयार हूं”। उन्होंने इसे किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक कठिन निर्णय बताया, जिसे उन्हें लेना पड़ा। यह संदेश उनके विश्वास का प्रतीक है कि देश के किसानों के अधिकारों के लिए किसी भी मुश्किल को सहन किया जा सकता है।
स्वामीनाथन की जन्म शताब्दी पर वैश्विक सम्मेलन में दी यह बात
प्रधानमंत्री मोदी यह टिप्पणी दिवंगत कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन के दौरान कर रहे थे। यह सम्मेलन तीन दिनों तक चलेगा और इसमें विभिन्न वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और विकास पेशेवरों को एक मंच पर लाकर कृषि के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा।
स्वामीनाथन जी को भारत में ‘हरित क्रांति’ का जनक माना जाता है। उनके योगदान ने भारत में खाद्य उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि की और कृषि में आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से किसानों की स्थिति सुधारने में मदद की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर एक विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया, जो एम.एस. स्वामीनाथन की विरासत और उनके योगदान का प्रतीक हैं।
अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने से उत्पन्न संकट
अमेरिका द्वारा भारतीय कृषि उत्पादों, खासकर गेहूं और चावल पर टैरिफ को 50 प्रतिशत तक बढ़ाए जाने के बाद भारतीय किसानों और उत्पादकों के लिए निर्यात बाजार में चुनौतियां बढ़ गई हैं। इस बदलाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिकी बाजार भारत के कृषि उत्पादों का एक महत्वपूर्ण निर्यात स्थल है।
इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि कृषि सेक्टर को निरंतर वैश्विक बाजारों से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि भारतीय किसान दुनिया भर में अपनी उपज बेच सकें। अब यह टैरिफ संकट न केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय किसानों के भविष्य के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
किसानों का हक, हमारी प्राथमिकता
पीएम मोदी ने किसानों के हितों की रक्षा को अपनी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उनका कहना था कि भले ही इस रास्ते में कितनी भी कठिनाइयां आएं, वह कभी भी किसानों के हक से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हर कदम पर किसानों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है, चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी बड़ी कीमत चुकानी पड़े।
स्वामीनाथन की विरासत और कृषि के भविष्य पर चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर स्वामीनाथन जी के योगदान को सराहा और कहा कि उनकी खोजों और प्रयासों ने भारतीय कृषि के चेहरे को बदल दिया। उनका कार्य कृषि में नवाचार लाने, उच्च उपज वाली किस्मों के विकास और किसानों के जीवन को सुधारने के लिए आधार साबित हुआ। इस सम्मेलन में जैव विविधता, सतत कृषि और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
स्वामीनाथन जी की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF) और वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज (TWAS) मिलकर एमएस स्वामीनाथन फूड एंड पीस पुरस्कार की शुरुआत करेंगे। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों या संस्थाओं को दिया जाएगा, जिन्होंने कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
आखिरकार, क्या है इस सख्त निर्णय का महत्व?
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भारतीय किसानों के हितों के लिए एक सशक्त संकल्प है। जब वैश्विक व्यापार संकट भारत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है, तो यह संदेश किसानों के लिए है कि उनकी सरकार हर हालत में उनके साथ खड़ी रहेगी। यही कारण है कि पीएम मोदी ने इस फैसले के लिए किसी भी कीमत को तैयार होने की बात की है।
#WATCH | Delhi: At the MS Swaminathan Centenary International Conference, Prime Minister Narendra Modi says, “…Today, discussions about biodiversity are happening worldwide, and governments are taking many steps to protect it. But Dr. Swaminathan took a step further and gave… pic.twitter.com/WbZqImLhqY
— ANI (@ANI) August 7, 2025
भारत के किसानों के लिए यह वक्त बेहद महत्वपूर्ण है, और पीएम मोदी ने यह साबित किया है कि उनका सरकार इस संघर्ष में पूरी तरह से किसानों के साथ खड़ी रहेगी, चाहे अमेरिकी टैरिफ में कितना भी इजाफा क्यों न हो।
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