भारत-मॉरीशस के रिश्तें
भारत और मॉरीशस के बीच संबंध सदियों पुराने हैं। 19वीं शताब्दी में भारतीय प्रवासियों ने मॉरीशस की अर्थव्यवस्था और समाज को आकार दिया, जिससे आज मॉरीशस की आबादी का लगभग 70% इंडो-मॉरीशियन है। यह सांस्कृतिक बंधन वाराणसी जैसे पवित्र स्थानों से जुड़ा हुआ है, जहां गंगा की धारा दोनों देशों की आध्यात्मिकता को जोड़ती है। मार्च 2025 में पीएम मोदी की मॉरीशस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने संबंधों को ‘एन्हांस्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया, जो विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण और उभरते क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्लू इकोनॉमी पर केंद्रित है। रामगुलाम की यह यात्रा उनका वर्तमान कार्यकाल में पहला द्विपक्षीय विदेश दौरा है, जो भारत को मॉरीशस के लिए प्राथमिकता साझेदार के रूप में रेखांकित करता है।
पीएम मोदी का रोड शो
PM मोदी वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे। उनका स्वागत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। यह स्वागत समारोह मॉरीशस पीएम रामगुलाम की यात्रा के संदर्भ में विशेष महत्व रखता था। हवाई अड्डे से पीएम मोदी हेलीकॉप्टर द्वारा पुलिस लाइन पहुंचे, जहां से वे सड़क मार्ग से होटल ताज की ओर रवाना हुए। यह यात्रा लगभग 3 किलोमीटर लंबी थी, जो एक भव्य रोड शो के रूप में परिवर्तित हो गई।

India-Mauritius Relations: मोदी का शंखनाद से स्वागत
रोड शो के दौरान सड़कों के किनारे हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे। जनता ने पीएम मोदी का स्वागत फूलों की वर्षा, शंखनाद और नारों से किया। उत्साह की लहर देखकर पीएम मोदी ने ड्राइवर से गाड़ी को जनता के करीब ले जाने का निर्देश दिया, जिससे रोड शो और अधिक जीवंत हो गया। भाजपा ने छह स्थानों पर विशेष व्यवस्थाएं की थीं, जहां से पीएम को भव्य स्वागत दिया गया। यह रोड शो न केवल स्थानीय समर्थन का प्रतीक था, बल्कि मॉरीशस पीएम की यात्रा के संदर्भ में भारत की मेजबानी की गरिमा को भी दर्शाता था। रोड शो के बाद पीएम मोदी होटल ताज पहुंचे, जहां द्विपक्षीय वार्ता का आयोजन था।
द्विपक्षीय वार्ता और समझौते
होटल ताज में पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने मॉरीशस पीएम रामगुलाम से औपचारिक मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। यह वार्ता लगभग 11:30 बजे शुरू हुई और विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण तथा स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित रही। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी रामगुलाम से मुलाकात की, जहां बहुआयामी साझेदारी पर चर्चा हुई।

India-Mauritius Relations: पीएम मोदी का बयान
वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस मीट को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा, “काशी सदियों से भारत की सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक रही है। हमारी परंपराएं और मूल्य मॉरीशस तक पहुंचे और वहां गहराई से जड़ें जमा लीं। आज मॉरीशस के मित्रों का काशी में स्वागत न केवल औपचारिक अवसर है, बल्कि भावनात्मक बंधन भी है। भारत और मॉरीशस केवल साझेदार नहीं, बल्कि एक परिवार हैं।” रामगुलाम ने स्वागत की भव्यता पर आश्चर्य व्यक्त किया, “वाराणसी में जो स्वागत मिला, वह अभूतपूर्व है। यह पीएम मोदी का क्षेत्र है, इसलिए समझ आता है कि वे इतने बड़े बहुमत से चुने जाते हैं।”

भारत-मॉरीशस के बीच समझौते
इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए। मार्च 2025 की यात्रा के बाद यह दूसरा बड़ा कदम था। प्रमुख समझौतों में शामिल हैं:
1. स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली (Local Currency Settlement System)
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और मॉरीशस सेंट्रल बैंक के बीच यह समझौता व्यापार को स्थानीय मुद्रा (INR-MUR) में सुगम बनाएगा, जो व्यापार लागत को कम करेगा।
2. समुद्री सुरक्षा और सफेद शिपिंग सूचना साझा करना
भारतीय नौसेना और मॉरीशस सरकार के बीच तकनीकी समझौता, जो समुद्री डोमेन जागरूकता बढ़ाएगा।
3. समुद्री क्षेत्र प्रबंधन पर MOU
भारतीय नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज और मॉरीशस पीएमओ के बीच, जो ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करेगा।
4. विकास और क्षमता निर्माण पर फोकस
फेज-II हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर चर्चा, जिसमें जल बुनियादी ढांचे के लिए 487 करोड़ रुपये की क्रेडिट लाइन शामिल है।
5. डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) में संशोधन
7 मार्च 2024 को हस्ताक्षरित प्रोटोकॉल को अंतिम रूप, जो कर चोरी रोकने पर केंद्रित है।
6. व्यापक आर्थिक सहयोग और साझेदारी समझौता (CECPA)
2021 में हस्ताक्षरित, लेकिन 2025 में विस्तार, जो मॉरीशस को भारत के बाजार में 615 टैरिफ लाइनों पर प्राथमिकता देगा।
ये समझौते द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देंगे, जो वर्तमान में मजबूत है—मॉरीशस भारत का दूसरा सबसे बड़ा FDI स्रोत है (2023-24 में 7.97 बिलियन USD)।
IIT मद्रास और मॉरीशस यूनिवर्सिटी के बीच समझौता
शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, आईआईटी मद्रास ने मॉरीशस की एक प्रमुख यूनिवर्सिटी के साथ समझौता (MoU) किया। हालांकि सटीक विवरण 2025 में उपलब्ध स्रोतों से सीमित हैं, लेकिन यह संयुक्त शोध, छात्र विनिमय और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। आईआईटी मद्रास ने 2025 में कई MoU साइन किए हैं, जैसे SWAYAM Plus के लिए उद्योग और संस्थानों के साथ, जो रोजगार-केंद्रित कोर्स प्रदान करते हैं। मॉरीशस के साथ यह समझौता स्वास्थ्य, AI, रोबोटिक्स और IoT जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएगा।

‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति
यह MoU भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति को मजबूत करता है। मॉरीशस के छात्रों को आईआईटी मद्रास के कार्यक्रमों में प्रवेश मिलेगा, जबकि संयुक्त शोध परियोजनाएं वैश्विक दक्षिण के लिए नवाचार लाएंगी। 2025 में आईआईटी मद्रास ने NIRF रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया, जो इस साझेदारी को और विश्वसनीय बनाता है।
