Effect on Sleep: आजकल लगभग हर किसी की लाइफ स्क्रीन से जुड़ी हुई है। चाहे मोबाइल फोन हो, लैपटॉप, टैबलेट या स्मार्ट टीवी – दिन का बड़ा हिस्सा इन पर बीतता है। अक्सर कहा जाता है कि रात को स्क्रीन देखने से नींद खराब हो जाती है (Poor Sleep)। इसकी वजह डिवाइस से निकलने वाली ब्लू लाइट (Blue Light) मानी जाती है। लेकिन क्या सिर्फ ब्लू लाइट ही आपकी नींद उड़ाती है या इसके पीछे और भी कारण हैं? आइए जानते हैं।
क्या ब्लू लाइट सच में नींद खराब करती है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारी बॉडी क्लॉक यानी सर्केडियन रिद्म को प्रभावित कर सकती है। यह मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन कम कर देती है, जो नींद लाने में मदद करता है।
1. 2013 की स्टडी: पाया गया कि पूरी ब्राइटनेस पर लगातार दो घंटे तक आईपैड इस्तेमाल करने वालों की नींद पर असर पड़ा। लेकिन सिर्फ एक घंटे इस्तेमाल करने से कोई खास फर्क नहीं हुआ।
2. 2014 का रिसर्च: लगभग 9 फीट दूरी से टीवी देखने पर मेलाटोनिन लेवल पर कोई खास असर नहीं दिखा।
3. 2018 की स्टडी: स्क्रीन की ब्राइटनेस को सबसे अहम फैक्टर माना गया। ज्यादा ब्राइटनेस असर बढ़ाती है, जबकि नाइट मोड या कम ब्राइटनेस इसका असर घटा सकते हैं।
यानी, सिर्फ ब्लू लाइट ही नहीं बल्कि स्क्रीन की ब्राइटनेस और इस्तेमाल का समय भी नींद पर असर डालते हैं।

धूप क्यों है जरूरी?
एक और दिलचस्प पहलू यह है कि दिन में मिलने वाली प्राकृतिक धूप रात को स्क्रीन की रोशनी के असर को कम कर देती है। अगर दिनभर धूप में समय बिताया जाए, तो शाम को स्क्रीन लाइट का असर उतना हानिकारक नहीं होता।
यानी, नींद पर स्क्रीन का असर हर किसी पर एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग हल्की सी रोशनी से जागे रह जाते हैं, जबकि कुछ पर घंटों फिल्म देखने का भी असर नहीं होता। यह व्यक्ति की संवेदनशीलता (sensitivity) पर निर्भर करता है।
स्क्रीन पर की जाने वाली एक्टिविटी…
नई रिसर्च बताती है कि नींद खराब होने में सिर्फ रोशनी ही जिम्मेदार नहीं है। बल्कि स्क्रीन पर की जाने वाली गतिविधियां (Activities) इसका बड़ा कारण हैं।
1. सोशल मीडिया स्क्रॉल करना।
2. एक्शन गेम खेलना।
3. ऑनलाइन शॉपिंग करना।
4. न्यूज पढ़ना या चैटिंग करना।
ये सभी काम हमारे दिमाग के रिवार्ड सिस्टम को एक्टिव कर देते हैं। इससे डोपामाइन नामक केमिकल रिलीज होता है, जो दिमाग को अलर्ट और एक्टिव रखता है। ऐसे में सोना मुश्किल हो जाता है, चाहे ब्लू लाइट हो या न हो।
2024 के रिसर्च में पाया गया कि जो लोग सोने से पहले गेम खेलते या चैटिंग करते, उनकी नींद देर से आती और नींद की कुल अवधि भी कम हो जाती। लेकिन सिर्फ टीवी या फिल्म देखने वालों की नींद पर खास असर नहीं पड़ा।

क्या स्क्रीन कभी नींद में मदद कर सकती है?
यह सुनकर अजीब लगेगा, लेकिन हां, कुछ हालात में स्क्रीन मददगार भी हो सकती है।
1. अगर दिमाग चिंता या नेगेटिव विचारों से भरा हो, तो कॉमेडी शो या कोई हल्की-फुल्की सीरीज देखना तनाव कम कर सकता है।
2. पुरानी और जानी-पहचानी फिल्म देखने से दिमाग डिस्ट्रैक्ट होता है और नींद आसानी से आ सकती है।
यानी, स्क्रीन हमेशा नींद की दुश्मन नहीं होती। फर्क इस बात से पड़ता है कि आप क्या देख रहे हैं और किस मूड में देख रहे हैं।

नींद सुधारने के लिए क्या करें?
अगर आप चाहते हैं कि स्क्रीन आपकी नींद न खराब करे, तो ये कुछ उपाय अपना सकते हैं:-
1. सोने से कम से कम 1 घंटे पहले स्क्रीन से दूरी बनाएं।
2. फोन या लैपटॉप पर नाइट मोड/ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें।
3. स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें।
4. दिन में पर्याप्त धूप लें, ताकि रात को असर कम हो।
5. सोने से पहले सोशल मीडिया, गेमिंग या चैटिंग से बचें।
6. हल्का म्यूजिक या कॉमेडी शो देख सकते हैं, ताकि दिमाग रिलैक्स हो।
