जम्मू-कश्मीर को लेकर गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला
जम्मू में बढ़ती आतंकी गतिविधियों और हमलों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के लिए स्थायी केंद्र स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। इस केंद्र में एनएसजी के तीन से चार घटक हमेशा तैनात रहेंगे। एनएसजी ने जम्मू के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ बाहरी इलाकों में बहुमंजिला इमारतों, सुरक्षा प्रतिष्ठानों और संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों का सुरक्षा ऑडिट कराकर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अपनी कार्ययोजना भी तैयार की है।
एनएसजी 2018 से श्रीनगर में तैनात है
केंद्र के इस फैसले से अब आतंकी हमलों और जम्मू और उससे आस-पास के इलाकों में, खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में आतंकी हमलों और ऐसी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली या चंडीगढ़ से एनएसजी बुलाने की जरूरत नहीं होगी। अब तक, एनएसजी को 2018 से जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में स्थायी रूप से तैनात किया गया है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के निर्देशों के अनुसार किया गया था।
अधिकारियों के मुताबिक, “पिछले कुछ सालों में जम्मू में आतंकी गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है। खुफिया एजेंसियों ने जम्मू शहर के अंदर आतंकियों द्वारा बड़े हमले की आशंका भी जताई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर जम्मू में एनएसजी को स्थायी मंजूरी दे दी है। एनएसजी कर्मियों का एक समूह अब स्थायी आधार पर जम्मू में मौजूद रहेगा।
आतंकवाद विरोधी दस्ते प्रमुख भूमिका निभाएंगे
एनएसजी कमांडो को जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा जम्मू-कश्मीर के लिए तैनात आतंकवाद-रोधी कार्य योजना के तहत तैनात किया गया है। लेकिन एनएसजी कमांडो की तैनाती का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि अब जम्मू और उसके आस-पास के क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों की कमान केवल एनएसजी ही संभालेगी। यह जिम्मेदारी पूरी तरह से जम्मू-कश्मीर पुलिस की है और यह और उसका आतंकवाद रोधी दस्ता आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा।
