Problems and Changes During Periods: पीरियड्स एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, जो हर महिला के शरीर में लगभग हर महीने होती है। जब महिला के शरीर में गर्भधारण नहीं होता, तो गर्भाशय की परत का ऊपरी हिस्सा टूटकर रक्त के रूप में बाहर निकलता है। इसे ही पीरियड्स कहा जाता है। यह प्रक्रिया लगभग 3 से 7 दिनों तक चलती है और हर महीने एक निर्धारित अंतराल पर होती है।
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पीरियड्स की शुरुआत औसतन 12-13 वर्ष की उम्र में होती है और यह 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच समाप्त हो जाते हैं, जब महिला के शरीर में मेनोपॉज की स्थिति आती है।
Problems and Changes During Periods: पीरियड्स के दौरान होने वाली शारीरिक बदलाव

1.रक्तस्राव (Bleeding):
यह सबसे प्रमुख लक्षण होता है। हर महिला का रक्तस्राव अलग-अलग होता है, कुछ महिलाएं भारी रक्तस्राव का सामना करती हैं, जबकि कुछ महिलाएं हलके रक्तस्राव के साथ पीरियड्स का अनुभव करती हैं।
2.एंठन (Cramps):
पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पेट में ऐंठन और दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द गर्भाशय की मांसपेशियों के सिकुड़ने से होता है।
3.सिरदर्द (Headaches):
हार्मोनल बदलावों के कारण कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान सिरदर्द या माइग्रेन की समस्या हो सकती है।
4.थकावट और कमजोरी (Fatigue):
रक्तस्राव के कारण शरीर में आयरन की कमी हो सकती है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।
5.त्वचा पर बदलाव (Skin Changes):
पीरियड्स के दौरान हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण त्वचा पर मुंहासे (acne) या रैशेज हो सकते हैं।
मानसिक और भावनात्मक बदलाव
1.मूड स्विंग्स (Mood Swings):
हार्मोनल परिवर्तन के कारण महिलाओं में मूड स्विंग्स यानी अचानक खुश या दुखी महसूस करना आम बात होती है। कभी-कभी तनाव, चिड़चिड़ापन या अवसाद (depression) का भी सामना करना पड़ सकता है।
2.चिंता और तनाव (Anxiety and Stress):
पीरियड्स के दौरान महिलाएं मानसिक तनाव का अनुभव कर सकती हैं। यह हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है, जो मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है।

पीरियड्स के दौरान महिलाओं को क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
1.स्वच्छता का ध्यान रखें
1.पीरियड्स के दौरान स्वच्छता बहुत महत्वपूर्ण है। गंदगी और संक्रमण से बचने के लिए सही पैड या टैम्पोन का उपयोग करें और इन्हें समय-समय पर बदलते रहें।
2.दिन में कम से कम तीन से चार बार पैड बदलें और सुनिश्चित करें कि पैड सूखा और साफ हो।
2.पानी की अधिकता (Hydration)
पीरियड्स के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे थकान और सिरदर्द हो सकते हैं। इसलिए, ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। यह शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और दर्द को कम करने में मदद करता है।
3.संतुलित आहार (Balanced Diet)
1.पीरियड्स के दौरान आयरन, कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है, जो थकावट और कमजोरी का कारण बनता है।
2.हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल, और साबुत अनाज को आहार में शामिल करें।
3.मीठे और तले हुए खाद्य पदार्थों से बचें क्योंकि यह शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं।
4.शारीरिक गतिविधि (Physical Activity)
हल्की शारीरिक गतिविधि, जैसे कि योगा या वॉक, पीरियड्स के दौरान राहत दिला सकती है। यह रक्त प्रवाह को सामान्य बनाए रखता है और ऐंठन (cramps) को कम करने में मदद करता है। ज्यादा भारी व्यायाम से बचें क्योंकि यह पीरियड्स के दौरान असुविधा पैदा कर सकता है।
Problems and Changes During Periods: पीरियड्स से जुड़ी सामान्य समस्याएँ

1.पीरियड्स का अनियमित होना
कई महिलाओं को पीरियड्स का समय पर न आना या बहुत अधिक समय तक खिंचना होता है। यह तनाव, वजन बढ़ने, या हार्मोनल असंतुलन के कारण हो सकता है। अगर यह समस्या अधिक समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
2.बहुत अधिक रक्तस्राव (Heavy Bleeding)
कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान बहुत अधिक रक्तस्राव का सामना करना पड़ता है। इसे हाइपरमेनोरिया कहा जाता है। यह गर्भाशय के संक्रमण या किसी अन्य मेडिकल समस्या का संकेत हो सकता है।
3.पीरियड्स में दर्द (Dysmenorrhea)
यह एक सामान्य समस्या है, जिसमें पीरियड्स के दौरान महिलाओं को ऐंठन और दर्द का सामना करना पड़ता है। यह दर्द हलका से लेकर गंभीर तक हो सकता है।
4.पीरियड्स में देरी (Delayed Periods)
पीरियड्स का देरी से आना या बंद हो जाना कई कारणों से हो सकता है, जैसे मानसिक तनाव, वजन में बदलाव, या हार्मोनल असंतुलन।
5.पीरियड्स और गर्भधारण
पीरियड्स के दौरान महिलाओं को गर्भधारण की संभावना कम होती है, लेकिन यह पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। यदि महिला के पीरियड्स अनियमित हैं, तो वह अपने ओव्यूलेशन के समय के बारे में सही जानकारी न होने के कारण गर्भवती हो सकती है। इसलिए, यदि आप गर्भवती होने से बचना चाहती हैं, तो हमेशा सही गर्भनिरोधक उपायों का उपयोग करें।
Problems and Changes During Periods: पीरियड्स से जुड़ी भारतीय मान्यताएँ और भ्रांतियाँ
भारत में पीरियड्स (महावारी) को लेकर कई पुरानी मान्यताएँ और भ्रांतियाँ मौजूद हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। समाज में इन भ्रांतियों का गहरा प्रभाव है, और यह महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान कर सकता है। इन गलत धारणाओं के चलते महिलाओं को शर्मिंदगी, असुविधा और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। आइए जाने कुछ भारतीय मान्यताओं और भ्रांतियों
1.पीरियड्स में पूजा करने से मनाई..
भारत के कई हिस्सों में यह मान्यता है कि पीरियड्स के दौरान महिलाएं मंदिर नहीं जा सकती, पूजा-अर्चना नहीं कर सकतीं, वे धार्मिक कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों से दूर रहनी चाहिए। इसे ‘अशुद्धता’ (impurity) का प्रतीक माना जाता है।
2.परछाई से खाद्य पदार्थ का खराब होना
कई जगह आचार, पापड़ कई चीजे बनाते समय अगर कोई महिला पीरियड्स से है तो उसे दूर जाने को कहते है। और कहते है छूना मत मान्यता है कहें या भ्रांति जो महिला पीरियड्स में होती हैं, उनके मात्र परछाई पड़ जाने से चीजे खराब हो जाती हैं। जैसे आचार, पापड़, बरी आदि।
3.पीरियड्स के दौरान खट्टा न खाए..
भारत में यह मान्यता भी प्रचलित है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को खट्टी चीजे नहीं खाना चाहिए जैसे कि दही, खट्टे फल, नमकीन, आदि। माना जाता है कि इन खाद्य पदार्थों का सेवन महिलाओं के शारीरिक स्थिति को बिगाड़ सकता है।
4.पीरियड्स को लेकर शर्मिंदगी..
भारत में कई जगहों पर महिलाओं को पीरियड्स के बारे में खुलकर बात करने में शर्मिंदगी महसूस होती है। अगर कोई बात करता है तो उसे धीरे बोलने के लिए कहा जाता है। यह भी एक प्रमुख भ्रांति है कि पीरियड्स के बारे में बात करना अशिष्टता है या शर्मनाक है। आज भी गांवों में सैनिटरी पैड लेने के लिए महिला दुकानदार की तलाश में रहती है।
पीरियड्स महिलाओं के जीवन का एक सामान्य हिस्सा
पीरियड्स महिलाओं के जीवन का एक सामान्य हिस्सा हैं, लेकिन इसके साथ जुड़ी शारीरिक और मानसिक समस्याओं को सही ढंग से समझना और उनका ध्यान रखना जरूरी है। उचित आहार, स्वच्छता, और शारीरिक गतिविधि को अपनाकर महिलाएं पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्याओं से बच सकती हैं और इस समय को आरामदायक बना सकती हैं। अगर पीरियड्स से जुड़ी कोई गंभीर समस्या उत्पन्न हो, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

