शनि की साढ़ेसाती से मिलेगी मुक्ति, हर काम होगा आसान! –
PEEPAL PUJA: पीपल का वृक्ष भारतीय संस्कृति में बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना जाता है. ज्योतिष के मुताबिक यह न केवल एक वृक्ष है बल्कि इसे सभी देवों का वास भी माना जाता है. खासकर शनिवार के दिन. मान्यता है कि शनिवार को पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकट दूर होते है.
पीपल में देवताओं का वास
पीपल के पूरे वृक्ष पर कई देवताओं का वास माना जाता है. पीपल की जड़ में ब्रह्मा, मध्य भाग में विष्णु और अगले भाग में महेश का निवास होता है. इसके अतिरिक्त, वसु, रुद्र, वेद, यज्ञ, समुद्र, कामधेनु और कई अन्य देवी-देवताओं का वास भी पीपल के वृक्ष में माना जाता है.
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पीपल के वृक्ष का ज्योतिषीय महत्व
ग्रहों की शांति: यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में ग्रह अपना शुभ प्रभाव नहीं दे रहे हों, तो पीपल का वृक्ष लगाने या उसमें जल चढ़ाने से ग्रहों की शांति होती है.
राहु-केतु का प्रभाव: राहु और केतु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए पीपल का वृक्ष लगाना लाभकारी होता है.
शनि के कुप्रभाव से मुक्ति: कुंडली में शनि के कुप्रभाव, जैसे साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित व्यक्ति को पीपल के वृक्ष पर रोजाना जल चढ़ाना चाहिए. इससे शनि का नकारात्मक प्रभाव शांत होता है. शाम के समय पीपल के वृक्ष के पास दीया जलाने से भी शनि ग्रह की शांति होती है. कुंडली में शनि के प्रभाव को शांत करने के लिए पीपल में जल चढ़ाते समय शनि मंत्र का स्मरण करें.ॐ शं शनयै नमः या ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः
पीपल पर शाम के समय दीया जलाने का महत्व: पीपल वृक्ष के नीचे शाम के समय सरसों के तेल का दीया जलाने से लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. संध्याकाल में सूर्यास्त के बाद सरसों का तेल डालकर दीया जलाना चाहिए.
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PEEPAL PUJA: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. नेशन मिरर एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है.
