
पावागढ़ का महाकाली मंदिर एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर पावागढ़ पहाड़ी पर 822 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे पहुंचने के लिए श्रद्धालु या तो लगभग 2,000 सीढ़ियां चढ़ते हैं या फिर रोपवे का उपयोग करते हैं। इस हादसे ने मंदिर की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में दहशत पैदा कर दी है।
‘उड़न खटोला’ में तकनीकी खराबी
पावागढ़ में दो अलग-अलग रोपवे संचालित होते हैं: एक यात्री रोपवे, जिसे ‘उड़न खटोला’ के नाम से जाना जाता है, और दूसरा सामान ले जाने वाला (गुड्स) रोपवे। यह हादसा गुड्स रोपवे में हुआ, जो मंदिर तक सामान पहुंचाने के लिए उपयोग किया जाता है। उड़न खटोला रोपवे, जो 1986 में शुरू हुआ था, उषा ब्रेको लिमिटेड द्वारा संचालित किया जाता है और यह 763 मीटर लंबा है, जो यात्रियों को माची से मंदिर तक 6 मिनट में पहुंचाता है। हालांकि, इस हादसे में प्रभावित गुड्स रोपवे की तकनीकी स्थिति और रखरखाव की जांच अभी शुरू की गई है।

पुलिस और प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रोपवे का तार अचानक टूट गया, जिसके कारण ट्रॉली अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई। तकनीकी खराबी, रखरखाव में कमी, या अन्य कारकों की जांच की जा रही है। यह भी बताया गया है कि हादसे के समय ट्रॉली में सामान के साथ-साथ कुछ कर्मचारी भी मौजूद थे, जो मंदिर के लिए आवश्यक सामग्री ले जा रहे थे।
पावागढ़ में रोपवे हादसे
पावागढ़ के रोपवे में यह पहला हादसा नहीं है। इससे पहले 19 जनवरी 2003 को यात्री रोपवे में एक बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी और 24 अन्य घायल हो गए थे। उस समय भी रोपवे का तार टूटने के कारण तीन केबिन नीचे गिर गए थे, और छह अन्य केबिन हवा में लटक गए थे। इस हादसे के बाद कई घंटों तक बचाव कार्य चला था, जिसमें सेना और वायुसेना की मदद ली गई थी। 2003 के हादसे ने रोपवे की सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल उठाए थे, और अब यह ताजा हादसा एक बार फिर रोपवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

हाल ही में, 25 अगस्त 2023 को भी पावागढ़ के यात्री रोपवे में एक तकनीकी खराबी के कारण 40 से अधिक यात्री 763 मीटर की ऊंचाई पर 40 मिनट तक हवा में फंसे रहे थे। उस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ था, लेकिन इसने रोपवे की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं। इसके बाद उषा ब्रेको लिमिटेड से रखरखाव और सुरक्षा रिकॉर्ड की जांच की गई थी।
Pavagadh Mahakali Temple Ropeway Accident: मुआवजे की घोषणा
हादसे की खबर मिलते ही गुजरात सरकार ने त्वरित कार्रवाई शुरू की। पंचमहाल जिला प्रशासन और पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी। गुजरात के मुख्यमंत्री ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजे की घोषणा की। साथ ही, सरकार ने इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
पंचमहाल के पुलिस अधीक्षक ने कहा कि रोपवे की तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई है। यह टीम हादसे के कारणों का पता लगाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। इसके अलावा, रोपवे के संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार कंपनी से सभी आवश्यक दस्तावेज मांगे गए हैं।
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महाकाली मंदिर प्रमुख शक्तिपीठ
पावागढ़ का महाकाली मंदिर गुजरात के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और इसे सती के अंग गिरने के स्थल के रूप में माना जाता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व पार्क के हिस्से के रूप में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है। हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां आते हैं, जिसके कारण रोपवे सेवा श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है, खासकर उन लोगों के लिए जो सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ हैं।
रोपवे की सुरक्षा और रखरखाव पर सवाल
इस हादसे ने न केवल स्थानीय समुदाय बल्कि पूरे देश में श्रद्धालुओं को झकझोर कर रख दिया है। रोपवे की सुरक्षा और रखरखाव पर सवाल उठ रहे हैं, और यह मांग की जा रही है कि मंदिर जैसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों पर सुरक्षा के उच्च मानकों को लागू किया जाए। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और रोपवे संचालक कंपनी पर दबाव बढ़ा दिया है कि वे भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।
