
पुलिस की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पौड़ी, श्री लोकेश्वर सिंह ने थानाध्यक्ष यमकेश्वर को अभियुक्त की शीघ्र गिरफ्तारी के निर्देश दिए। पौड़ी पुलिस ने अपनी जीरो टॉलरेन्स नीति को अमल में लाते हुए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की। पुलिस टीम ने विवेचनात्मक कार्यवाही शुरू की और ठोस साक्ष्य जुटाने के साथ-साथ सुरागरसी में कोई कसर नहीं छोड़ी। अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप, अभियुक्त योगेश कुमार (36 वर्ष), पुत्र स्वर्गीय सतीश कुमार, निवासी ग्राम कांडा, यमकेश्वर, पौड़ी गढ़वाल, को बिध्याणी तिराहा, यमकेश्वर के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इस मामले में विवेचना अभी भी जारी है।
Pauri Police Zero Tolerance: जीरो टॉलरेन्स नीति का प्रभाव
पौड़ी पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया कि महिला और बाल अपराधों के प्रति उनकी जीरो टॉलरेन्स नीति कितनी प्रभावी है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं। पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत ऐसे अपराधों में त्वरित कार्रवाई और सजा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। पौड़ी पुलिस ने इस मामले में न केवल त्वरित कार्रवाई की, बल्कि यह भी दिखाया कि अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
पुलिस टीम का योगदान
इस सफल कार्रवाई में थानाध्यक्ष यमकेश्वर श्री अरविंद कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सराहनीय कार्य किया। टीम में शामिल महिला उपनिरीक्षक दीक्षा सैनी, मुख्य आरक्षी विपिन कुमार (133 ना.पु.), और आरक्षी शोकत अली (27 ना.पु.) ने साक्ष्यों का संकलन और अभियुक्त की गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सक्रियता और समर्पण ने यह सुनिश्चित किया कि पीड़िता को त्वरित न्याय मिले और समाज में अपराधियों के प्रति कड़ा संदेश जाए।
Pauri Police Zero Tolerance: प्रशासन के लिए सबक
यह घटना एक बार फिर समाज और प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े करती है। नाबालिगों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कानून होने के बावजूद ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं? क्या सामाजिक जागरूकता और शिक्षा के अभाव में अपराधी बेखौफ हो रहे हैं? पौड़ी पुलिस की त्वरित कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन यह भी जरूरी है कि समाज में जागरूकता फैलाई जाए ताकि ऐसी घटनाएं कम हों। साथ ही, रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर मूलभूत सुविधाओं की कमी, जैसा कि रामनगर रेलवे स्टेशन की घटना में देखा गया, भी प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाती है।
भगवान सिंह की रिपोर्ट
