patanjali nepal land scam madhav nepal : नेपाल में ज़मीन हेराफेरी केस में माधव नेपाल पर केस दर्ज, बाबा रामदेव का नहीं जिक्र!
patanjali nepal land scam madhav nepal : नेपाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। एंटी करप्शन एजेंसी CIAA (Commission for Investigation of Abuse of Authority) ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है। ये केस पतंजलि योगपीठ-नेपाल से जुड़ी भूमि हेराफेरी से संबंधित है, जिसमें सरकारी नियमों को दरकिनार कर निजी संस्था को ज़मीन देने की अनुमति दी गई थी।
🏛️ किस पर लगा आरोप और क्यों?
पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल, जो इस समय सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट के अध्यक्ष हैं और संसद सदस्य भी, उन पर आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए पतंजलि को गैरकानूनी तरीके से ज़मीन खरीदने और बाद में कॉमर्शियल इस्तेमाल की इजाज़त दी।
मुख्य आरोप:
- लैंड सीलिंग लॉ (भूमि सीमा कानून) को मंत्रिमंडल की बैठक में हटाना
- पतंजलि को खेती के नाम पर ज़मीन अलॉट करना
- बाद में उसी ज़मीन की व्यावसायिक बिक्री की इजाजत देना
🧾 चार्जशीट में क्या कहा गया है?
- माधव नेपाल पर आरोप है कि उन्होंने 2009 से 2011 के कार्यकाल में इस फैसले को मंजूरी दी थी।
- सीआईएए के अनुसार, इससे सरकार को लगभग ₹18.6 करोड़ नेपाली रुपये का नुकसान हुआ।
- चार्जशीट में 93 अन्य लोगों के नाम भी हैं जो इस फैसले में शामिल थे।
- पतंजलि नेपाल के संस्थापक निदेशक शालीग्राम सिंह का नाम है।
👉 गौर करने वाली बात ये है कि बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण का नाम चार्जशीट में नहीं है।
🔇 बाबा रामदेव और बालकृष्ण क्यों नहीं शामिल?
चार्जशीट में पतंजलि के भारतीय प्रमुख बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण का नाम नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला नेपाल में पतंजलि की लोकल ब्रांच से जुड़ा है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत में बैठे पतंजलि प्रमुखों की सीधे संलिप्तता साबित नहीं हो पाई है — कम से कम अब तक।
⛔ माधव नेपाल की संसद सदस्यता निलंबित
नेपाल में संविधान के अनुसार, भ्रष्टाचार के आरोप लगते ही किसी भी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को निलंबित किया जाता है जब तक कि मामला पूरी तरह स्पष्ट न हो जाए।
- वर्तमान में सांसद माधव नेपाल को संसद सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है।
- माधव नेपाल ने आरोपों को नकारते हुए कहा है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है।
📍 क्या है ‘पुश्तैनी ज़मीन’ कानून और इसका हेरफेर?
नेपाल में “लैंड सीलिंग एक्ट” के तहत कोई भी संस्था या व्यक्ति सीमित मात्रा में ही ज़मीन खरीद सकता है, खासकर कृषि उद्देश्य के लिए।
लेकिन आरोप है कि तत्कालीन सरकार ने पतंजलि को इस कानून से छूट दी, जिससे उन्हें बहुत बड़ी ज़मीन सस्ते में मिल गई और बाद में कॉमर्शियल रूप में उसका इस्तेमाल किया गया।
📌 पतंजलि नेपाल प्रोजेक्ट – योग से व्यापार तक
पतंजलि योगपीठ-नेपाल को काठमांडू से 40 किमी दूर एक हर्बल रिसर्च और योग प्रशिक्षण केंद्र के तौर पर विकसित किया जाना था।
- इसका उद्देश्य बताया गया था: हर्बल खेती, योग शिक्षा और स्वदेशी चिकित्सा का प्रचार।
- लेकिन बाद में इसमें कॉमर्शियल प्लॉटिंग और रियल एस्टेट की गतिविधियों की बातें सामने आने लगीं।
🔍 CIAA की कार्रवाई – राजनीतिक साजिश या न्याय?
CIAA द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करना नेपाल में कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार मामला बड़ा है क्योंकि इसमें पूर्व प्रधानमंत्री की संलिप्तता बताई जा रही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षक दो राय में हैं:
- कुछ इसे राजनीतिक साजिश मानते हैं, जिससे माधव नेपाल की पार्टी को कमजोर किया जा सके।
- वहीं कुछ का मानना है कि ये प्रभावशाली लोगों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई है।
📰 इस खबर के मायने भारत के लिए
हालांकि भारत सरकार या पतंजलि के मुख्य संस्थापक इस विवाद में शामिल नहीं हैं, लेकिन चूंकि पतंजलि ब्रांड का नाम जुड़ा है, इससे भारतीय योग और आयुर्वेदिक संस्थानों की साख पर भी सवाल उठ सकते हैं।
⚖️ जांच से साफ़ होगा सच
ये मामला दिखाता है कि राजनीति, धर्म और व्यापार का संगम किस तरह से पारदर्शिता और नैतिकता पर सवाल खड़े कर सकता है। आने वाले हफ्तों में ये देखना दिलचस्प होगा कि:
- क्या माधव नेपाल दोषी साबित होते हैं?
- क्या पतंजलि ब्रांड पर कोई असर पड़ेगा?
- क्या भारत-नेपाल संबंधों में दरार आएगी?
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