देश की सबसे सुरक्षित इमारत में सेंध!
ये वही इमारत है जिसे नई संसद कहा गया, नए भारत का प्रतीक बताया गया जहां देश की आवाज उठती है, लोकतंत्र सांस लेता है।
लेकिन एक आम शख्स सुबह-सुबह दीवार कूदकर अंदर घुस जाता है।

सवाल सिर्फ इतना नहीं कि वो कैसे अंदर आया। असली सवाल है क्यों बार-बार संसद की सुरक्षा में चूक हो रही है?
क्या ये महज लापरवाही है? या कुछ बहुत जरूरी बदलने की ज़रूरत है?
संसद में सेंध: सुरक्षा के दावों की खुलती परतें
🕕 सुबह 6:30 बजे संसद की नींद खुली, गुरुवार, 22 अगस्त की सुबह। सभी को लगा था कि संसद का मानसून सत्र खत्म हो चुका है, सांसद जा चुके हैं, माहौल शांत है। लेकिन रेल भवन के पास, एक व्यक्ति पेड़ की मदद से दीवार पर चढ़ा और कूदकर संसद परिसर में दाखिल हो गया।
वो गरुड़ द्वार तक पहुंच गया, जो नए संसद भवन का अहम प्रवेश द्वार है। CISF की नजर पड़ी और तुरंत उसे दबोच लिया गया। अब उससे पूछताछ हो रही है।
याद कीजिए, ये पहली बार नहीं हुआ
16 अगस्त 2024 मानसिक बीमार युवक की घुसपैठ
सिर्फ एक साल पहले, 2:45 बजे दोपहर को एक युवक ने संसद की दीवार फांदी थी। शॉर्ट्स और टी-शर्ट में था, उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का मनीष निकला। पता चला कि वो मानसिक रूप से बीमार था, लेकिन सवाल फिर वही वो अंदर कैसे घुसा?
13 दिसंबर 2023 संसद में स्प्रे अटैक
संसद पर आतंकी हमले की बरसी थी। लेकिन उसी दिन 5 सुरक्षा लेयर पार कर दो युवक विजिटर्स गैलरी से लोकसभा तक पहुंच गए।
जूतों में पीला स्प्रे छुपाया था, जिसे उन्होंने पूरे सदन में फैला दिया। हंगामा मचा, भगदड़ हुई, और देश फिर स्तब्ध था।
13 दिसंबर 2001 इतिहास का सबसे काला दिन
वो दिन कोई नहीं भूल सकता। 5 आतंकी, AK-47 और ग्रेनेड के साथ सफेद एंबेसडर में आए और संसद भवन में घुस गए। 9 लोगों की जान गई, और तब से अब तक संसद को किले की तरह सुरक्षित बताया गया। लेकिन क्या वाकई?
हर बार सवाल वही, जवाब अब तक नहीं
दीवार कूदकर कोई संसद में कैसे घुस जाता है? क्या CCTV, ड्रोन, सेंसर, रेडियो फ्रीक्वेंसी जैमर सब फेल हो जाते हैं? जब संसद खाली भी हो, तब भी क्या सुरक्षा का स्तर गिरा दिया जाता है? सरकार ने लाखों खर्च कर संसद को नई और आधुनिक बनाया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था आज भी पुराने सिस्टम पर टिकी दिखती है।

संसद की सुरक्षा में कौन-कौन जिम्मेदार?
संसद की सुरक्षा मुख्य रूप से CISF और दिल्ली पुलिस के पास होती है हर गेट पर ID स्कैनर, RFID टैग, जांच मशीनें, और फेस रिकग्निशन सिस्टम लगे हैं लेकिन दीवारों की सुरक्षा का क्या? क्या जमीन से ऊपर की निगरानी ही काफी है? साफ है, जहां सिस्टम की सोच खत्म होती है, वहीं से खतरा शुरू हो जाता है।
Read More :- ITR-फाइलिंग: 1 महीने से भी कम टाइम बचा है, फिर लगेगा जुर्माना
Watch Now :- भोपाल में 92 करोड़ का ड्रग्स जब्त – क्या जिम्मेदार वही !
