संसद में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले पर विपक्ष घेरेगा सरकार
नई दिल्ली: संसद का बहुप्रतीक्षित मानसून सत्र आज यानी 21 जुलाई से शुरू हो गया है। यह सत्र 21 अगस्त तक चलेगा और माना जा रहा है कि ये 30 दिन भारतीय राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं।
जहां एक ओर सरकार अपने एजेंडे के साथ सत्र को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने कमर कस ली है — खासतौर पर पहलगाम आतंकी हमला, ऑपरेशन सिंदूर और एयर इंडिया हनी ट्रैप मामले जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
सत्र की शुरुआत से पहले ही माहौल गर्म
इस बार संसद सत्र की शुरुआत बेहद संवेदनशील मुद्दों के बीच हो रही है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले में सुरक्षा बलों की शहादत ने देश को झकझोर दिया है। इसी दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सेना की बड़ी कार्रवाई भी चर्चा में है, जिसे विपक्ष मानवाधिकार और पारदर्शिता के नाम पर निशाने पर ले रहा है।
विपक्ष का तेवर तेज: हर मुद्दे पर घेराव तय
कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, TMC और RJD समेत लगभग पूरा विपक्ष इस सत्र को बिहार चुनाव 2025 से पहले सरकार को बैकफुट पर लाने के अवसर के तौर पर देख रहा है। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष की रणनीति है कि हर रोज़ संसद में अलग-अलग मुद्दे उठाए जाएं — ताकि जनता का ध्यान सुरक्षा, आर्थिक असमानता और विदेश नीति की असफलताओं की ओर जाए।
विपक्ष के मुख्य मुद्दे
- पहलगाम आतंकी हमला: इंटेलिजेंस फेलियर का आरोप
- ऑपरेशन सिंदूर: जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग
- एयर इंडिया हनी ट्रैप केस: राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला
- महंगाई और बेरोज़गारी: चुनाव से पहले जनता को भड़काने का मुद्दा
BJP का जवाब: “हर सवाल का देंगे जवाब”
भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के तेवरों को देखते हुए पूरी रणनीति बना ली है। पार्टी प्रवक्ता का कहना है,
“हम संसद में हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं। सरकार ने पहलगाम हमले के बाद त्वरित एक्शन लिया और ऑपरेशन सिंदूर देश की सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी था।”
BJP की कोशिश होगी कि इन मुद्दों को राष्ट्रवाद और सुरक्षा के फ्रेम में पेश किया जाए, ताकि आम जनता का समर्थन हासिल किया जा सके। इसके अलावा, पार्टी की नज़र बिहार चुनावों पर भी है — और ऐसे में संसद का यह सत्र एक पॉलिटिकल स्टेज बन चुका है।
चुनावी मौसम की गूंज
सभी दलों की नजरें 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। विपक्ष की रणनीति साफ है — सत्र के ज़रिए मोदी सरकार को घेरो, और बिहार की ज़मीन पर उसका असर दिखाओ। वहीं BJP इस सत्र का इस्तेमाल अपनी उपलब्धियों और सुरक्षा-नीति की सख्ती को उजागर करने में करेगी।
संसद की कार्यवाही पर जनता रखेगी नजर
जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ेगा, संसद के गलियारों में बहस और टकराव की तीव्रता बढ़ेगी। क्या विपक्ष सरकार को झुका पाएगा? या फिर BJP एक बार फिर से अपनी रणनीतिक चतुराई से बाज़ी मार लेगी? इन सवालों के जवाब अगले 30 दिनों में मिलेंगे — लेकिन एक बात तय है, ये सत्र चुनावी मौसम की शुरुआत का शंखनाद है।
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