palamu naxal encounter : पलामू पुलिस का बड़ा ऑपरेशन: शशिकांत गंझू बना मुख्य आरोपी
palamu naxal encounter : पलामू, झारखंड: झारखंड के नक्सल प्रभावित पलामू जिले में एक बार फिर सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच तीखी मुठभेड़ हुई है। TSPC (झारखंड जनमुक्ति परिषद) के टॉप नक्सली कमांडरों के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की है। इस कार्रवाई में सबसे बड़ा नाम सामने आया है – शशिकांत गंझू, जिस पर ₹10 लाख का इनाम घोषित है।
🔥 कहाँ और कैसे हुई मुठभेड़?
यह मुठभेड़ मनातू थाना क्षेत्र के जसपुर होटवार जंगल में हुई। पुलिस को खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली थी कि TSPC के बड़े नक्सली कमांडर क्षेत्र में बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने एक विशेष सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
जैसे ही पुलिस टीम जंगल में दाखिल हुई, वहां छिपे नक्सलियों ने गोलियां बरसाना शुरू कर दीं। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने मोर्चा संभाला। हालांकि नक्सली घने जंगल का फायदा उठाकर भाग निकले, लेकिन पुलिस को मौके से AK-47 की गोलियां, अन्य हथियार और नक्सली सामग्री बरामद हुई।
👮♂️ कौन-कौन हैं आरोपी?
इस पूरे मामले में TSPC के कुख्यात नक्सली जिनके खिलाफ FIR दर्ज हुई है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- शशिकांत गंझू – ₹10 लाख का इनामी, TSPC का टॉप कमांडर
- मुखदेव यादव – ₹5 लाख का इनामी
- नगीना, गौतम, शंभु सिंह – सक्रिय नक्सली
- और आधा दर्जन अज्ञात नक्सली, जो घटनास्थल पर मौजूद थे
FIR मनातू थाना प्रभारी निर्मल उरांव के आवेदन पर दर्ज की गई है।
🚨 FIR में शामिल प्रमुख धाराएं:
- भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराएं
- आर्म्स एक्ट के अंतर्गत अपराध
- यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) जैसी कठोर कानूनी धाराएं
इन धाराओं के तहत गिरफ्तारी होने पर न्यायिक हिरासत और कठोर सजा का प्रावधान है।
🔍 ऑपरेशन में कौन-कौन रहे शामिल?
इस हाई-लेवल सर्च ऑपरेशन में झारखंड पुलिस की कई टॉप रैंकिंग अफसर और स्पेशल फोर्स यूनिट्स शामिल थीं:
- एएसपी अभियान – राकेश कुमार सिंह
- हुसैनाबाद एसडीपीओ – मोहम्मद याकूब
- डीएसपी – राजेश यादव
- मनातू थाना प्रभारी – निर्मल उरांव
- छत्तरपुर और नावाबाजार थाना प्रभारी
- स्पेशल कमांडो यूनिट – जगुआर टीम
यह ऑपरेशन सटीक रणनीति और विशेष टैक्टिक्स के तहत चलाया गया।
🗣️ एसपी रीष्मा रमेशन का बयान:
“टीएसपीसी के टॉप कमांडर शशिकांत गंझू के खिलाफ विशेष सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था। उसी दौरान मुठभेड़ की स्थिति बनी। पुलिस ने पूरे क्षेत्र को घेरकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।”
📈 पलामू: नक्सली गतिविधियों का हॉटस्पॉट
झारखंड का पलामू जिला लंबे समय से नक्सल हिंसा और उग्रवाद का केंद्र रहा है। खासकर TSPC और PLFI जैसे गुट यहां सक्रिय हैं। शशिकांत गंझू जैसे कमांडरों की मौजूदगी ने इलाके में अस्थिरता और आतंक को बढ़ावा दिया है।
इन कमांडरों के खिलाफ कार्रवाई से नक्सल नेटवर्क पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है।
🧠 विश्लेषण: क्यों है यह FIR इतनी अहम?
- यह एफआईआर सिर्फ कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि नक्सल संगठनों के खिलाफ सरकार की ‘Zero Tolerance Policy’ का स्पष्ट संकेत है।
- इनामी नक्सलियों के खिलाफ सक्रिय कार्रवाई से जंगलों में उनके छिपने और नेटवर्क चलाने की क्षमता पर असर पड़ेगा।
- आम जनता में विश्वास बढ़ेगा कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन नक्सलमुक्त झारखंड की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।
📌 भविष्य की रणनीति क्या हो सकती है?
- सघन तलाशी अभियान – पूरे क्षेत्र में TSPC के नेटवर्क को खत्म करने के लिए
- जनभागीदारी – गांवों में लोगों को जागरूक कर नक्सली विचारधारा से दूर रखने का प्रयास
- इंटेलिजेंस नेटवर्क – गुप्त सूचनाओं के जरिए शीर्ष नक्सलियों को ट्रैक किया जाएगा
- प्रेस और मीडिया के जरिए दबाव – ऐसे मामलों को सार्वजनिक कर नक्सलियों की पोल खोलना
पलामू के होटवार जंगल में हुई इस पुलिस-नक्सली मुठभेड़ और उसके बाद दर्ज की गई FIR ने एक बार फिर साबित कर दिया कि झारखंड में नक्सलवाद की कमर तोड़ने की कवायद तेज हो चुकी है।
शशिकांत गंझू जैसे शीर्ष कमांडरों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई इस बात का संकेत है कि राज्य अब ‘Red Zone’ नहीं रहना चाहता।
Read More :- भारत ने बांग्लादेश को दिया बड़ा झटका: रेडीमेड कपड़े और अन्य वस्तुओं पर लगाया प्रतिबंध
Watch Now :- घुटनों पर बैठ, अल्बानिया के पीएम
