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1971 युद्ध के बाद पहली बार बांग्लादेश पहुंचा पाकिस्तानी वॉरशिप: 4 दिन चटगांव में रहेगा

Shital Sharma November 9, 2025

भारत से तनाव के बीच करीब आ रहे दोनों देश

pakistan-warship-bangladesh-visit-2025

pakistan warship bangladesh visit 2025: बंगाल की खाड़ी में एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ जब 1971 के युद्ध के बाद पहली बार पाकिस्तान का एक युद्धपोत बांग्लादेश पहुंचा। शनिवार को पाकिस्तानी वॉरशिप PNS सैफ चटगांव बंदरगाह पर पहुंचा, जहां बांग्लादेश नौसेना के जहाज BNS शाधीनोता ने समुद्र में ही उसे सलामी दी और बंदरगाह तक एस्कॉर्ट किया। यह यात्रा चार दिन की “सद्भावना यात्रा” (Goodwill Visit) है, जो 12 नवंबर तक चलेगी। दोनों देशों की नौसेनाएं इस दौरान रक्षा सहयोग और सामरिक तालमेल बढ़ाने पर चर्चा करेंगी।

 54 साल बाद नौसैनिक कूटनीति

पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच यह पहला नौसैनिक संपर्क है जो 1971 के विभाजन युद्ध के बाद हुआ है। उस युद्ध के परिणामस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर स्वतंत्र बांग्लादेश बना था। तब से लेकर अब तक दोनों देशों के रक्षा संबंध ठंडे पड़े रहे। लेकिन 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन और नई मोहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के गठन के बाद से इस्लामाबाद और ढाका के रिश्तों में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान उन शुरुआती देशों में था जिसने यूनुस सरकार को आधिकारिक मान्यता दी थी। अब यह नौसैनिक यात्रा उस बढ़ती कूटनीतिक गर्मजोशी का संकेत मानी जा रही है।

बांग्लादेश का स्वागत और राजनयिक संकेत

चटगांव बंदरगाह पर बांग्लादेश नौसेना प्रमुख एडमिरल एम. शाहीन इकबाल ने खुद पाकिस्तानी अधिकारियों का स्वागत किया। आधिकारिक बयान में कहा गया कि “यह यात्रा क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और आपसी सहयोग को मजबूत करेगी।” दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच इस दौरान संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण सहयोग और समुद्री निगरानी जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा भारत-बांग्लादेश संबंधों में हालिया तनाव के बीच हुआ है। नई दिल्ली और ढाका के बीच सीमा सुरक्षा, नदी जल बंटवारे और अवैध प्रवास जैसे मुद्दों पर मतभेद गहराए हैं। ऐसे में पाकिस्तान का यह “गुडविल विजिट” ढाका के रणनीतिक संतुलन की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है।

तकनीकी पृष्ठभूमि: PNS सैफ की स्थिति

रिपोर्ट्स के मुताबिक, PNS सैफ इस समय तकनीकी खराबी से जूझ रहा है। जहाज के HP-5 स्टेबलाइजर सिस्टम में गड़बड़ी आई है, जो समुद्री यात्रा के दौरान जहाज की स्थिरता बनाए रखता है। इस खराबी के चलते जहाज को नियंत्रित करने और लंबी दूरी तय करने में दिक्कतें सामने आईं। PNS सैफ को चीन ने 2010 में पाकिस्तान को बेचा था। यह फ्रिगेट क्लास जहाज Type 22P सीरीज का हिस्सा है, जिसमें PNS शामशीर और PNS आसलत भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इन तीनों जहाजों में बार-बार समान तकनीकी समस्याएं आ रही हैं।

pakistan warship bangladesh visit 2025: चीन-पाक रक्षा सौदे पर सवाल

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन से खरीदे गए इन जहाजों पर पाकिस्तान ने करीब 6,375 करोड़ रुपये खर्च किए थे। लेकिन बार-बार सामने आ रही खराबियों ने चीनी रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर फिर सवाल खड़े किए हैं। रक्षा विश्लेषक कमर अली खान के मुताबिक, “चीन के हथियार भले ही सस्ते हों, लेकिन उनकी टिकाऊ क्षमता सीमित है। पाक नौसेना को अब इन जहाजों के रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।”

सामरिक प्रभाव और क्षेत्रीय संदर्भ

विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक कूटनीतिक कदम नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सामरिक संदेश भी है। भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान अब बांग्लादेश को “रणनीतिक साझेदार” के रूप में देख रहा है। दूसरी ओर, ढाका भी अपने विदेशी संबंधों को संतुलित करने की कोशिश में है ताकि किसी एक देश पर निर्भरता न रहे। हालांकि बांग्लादेश विदेश मंत्रालय ने इस दौरे को “सिर्फ सद्भावना यात्रा” बताया है, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि “दोनों देशों के बीच संवाद और विश्वास बहाली की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।”

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भारत की नजर और संभावित प्रतिक्रिया

भारतीय रणनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखी जा रही है। पूर्व नौसेना अधिकारी रिटायर्ड एडमिरल अनिल कुमार सिंह ने कहा, “यह यात्रा प्रतीकात्मक है, लेकिन क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत को अपनी समुद्री नीति में सतर्क रहना होगा।”

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