Pakistan Sells PIA: पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलों का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाने वाली पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) आखिरकार बिक गई है. सरकार ने अपनी हिस्सेदारी की नीलामी पूरी कर ली है और आरिफ हबीब ग्रुप ने इसे 4,320 करोड़ में खरीद लिया है. दिलचस्प बात यह रही कि यह सौदा सरकार के अनुमान से काफी ज्यादा कीमत पर हुआ.सरकार ने PIA की बिक्री से करीब ₹3,200 करोड़ मिलने का अनुमान लगाया था, लेकिन अंतिम बोली इससे ₹1,320 करोड़ अधिक रही ।
Read More:- India Bangladesh Tension: भारत–बांग्लादेश रिश्तों में तल्खी: ढाका-दिल्ली के बीच एक ही दिन में दो समन
Pakistan Sells PIA: ओपन बिडिंग में आरिफ हबीब ग्रुप ने मारी बाज़ी
PIA की नीलामी के अंतिम चरण में आरिफ हबीब ग्रुप और लकी सीमेंट ग्रुप के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली लकी सीमेंट ग्रुप की आखिरी बोली ₹4,288 करोड़ तक पहुंची जबकि आरिफ हबीब ग्रुप ने ₹4,320 करोड़ की बोली लगाकर सौदा अपने नाम कर लिया इससे पहले प्राइवेट एयरलाइन एयरब्लू भी दौड़ में थी. लेकिन पहले ही राउंड के बाद वह बाहर हो गई ।
कैसे हुई बोली की पूरी प्रक्रिया?
नीलामी के लिए कुल तीन दावेदार मैदान में थे
- लकी सीमेंट के नेतृत्व वाला कंसोर्टियम
- आरिफ हबीब कॉरपोरेशन के नेतृत्व वाला ग्रुप
- प्राइवेट एयरलाइन एयरब्लू
पहले चरण में सभी ने बंद लिफाफे में बोलियां जमा कीं
- आरिफ हबीब ग्रुप: ₹3,680 करोड़
- लकी सीमेंट ग्रुप: ₹3,248 करोड़
- एयरब्लू: ₹848 करोड़
इसके बाद एयरब्लू रेस से बाहर हो गई और दूसरे चरण में ओपन बिडिंग कराई गई ।
75% हिस्सेदारी बेची, सरकारी टीवी पर लाइव नीलामी
पाकिस्तान सरकार ने PIA में अपनी 75% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया था। इस्लामाबाद में आयोजित नीलामी कार्यक्रम में तीनों ग्रुप्स के प्रतिनिधियों ने ट्रांसपेरेंट बॉक्स में अपनी बोलियों के लिफाफे डाले,शाम 5:30 बजे लिफाफे खोले गए और नतीजों की घोषणा की गई पूरी प्रक्रिया को सरकारी टीवी पर लाइव दिखाया गया इससे ठीक दो दिन पहले फौजी फर्टिलाइज़र प्राइवेट लिमिटेड (FFPL) ने बोली प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया था।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बयान
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि सरकार ने निजीकरण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया है। उनके मुताबिक, यह सौदा पाकिस्तान के इतिहास के सबसे बड़े निजीकरण सौदों में से एक हो सकता है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे PIA को नई दिशा मिलेगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी।
सरकार को PIA बेचने की नौबत क्यों आई?
पाकिस्तान को IMF से 7 अरब डॉलर का कर्ज चाहिए। इसके बदले IMF घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों के निजीकरण पर जोर दे रहा है. PIA उन्हीं 24 सरकारी कंपनियों में शामिल है, जिन्हें प्राइवेट किया जा रहा है। सरकार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण PIA में जरूरी निवेश नहीं हो पा रहा था। लगातार खराब मैनेजमेंट और सेवाओं से यात्री भी परेशान थे।
2020 का विमान हादसा और खराब छवि
2020 में कराची में हुए PIA विमान हादसे में 96 लोगों की मौत हुई थी । जांच में 250 से ज्यादा पायलटों के लाइसेंस संदिग्ध पाए गए। इसके बाद कई देशों ने PIA की उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया. इसका नतीजा यह हुआ कि कंपनी पर करीब ₹25,000 करोड़ का कर्ज चढ़ गया ।
