pakistan ne kyun hataaya taref ka naam : पाकिस्तान ने क्यों किया यूएनएससी बयान में बदलाव?
pakistan ne kyun hataaya taref ka naam : पिछले हफ्ते, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के बयान से द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) का नाम हटाने पर जोर दिया। यह घटना पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद हुई, जिसमें 26 लोगों की मृत्यु हो गई थी। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सीनेट में दिए गए एक बयान में इस बात की पुष्टि की कि पाकिस्तान ने टीआरएफ के नाम को हटाने पर जोर दिया था। यह कदम अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में काफी चर्चा का विषय बन गया है और पाकिस्तान की आतंकवाद के प्रति नीति पर सवाल उठा रहा है।
पाकिस्तान का यूएनएससी में दबाव
पाकिस्तान वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है। सुरक्षा परिषद के निंदा वक्तव्य के लिए सभी सदस्यों की सहमति आवश्यक है। इशाक डार ने कहा कि अमेरिका ने हमले की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें सिर्फ पहलगाम लिखा था और हमले के लिए द रेजिस्टेंस फोरम (टीआरएफ) का नाम दिया गया था। पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और कहा कि वह तब तक इस पर हस्ताक्षर नहीं करेगा जब तक कि पहलगाम के साथ जम्मू-कश्मीर का भी उल्लेख नहीं किया जाता और टीआरएफ का नाम नहीं हटा दिया जाता।
अंतर्राष्ट्रीय दबाव और पाकिस्तान का रुख
इशाक डार ने कहा कि उन्होंने दो दिन तक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए। इस दौरान उन्हें कई देशों से फोन आते रहे, जिन्होंने उनसे कहा कि निंदा प्रस्ताव न होने से पाकिस्तान के खिलाफ आरोप लगेंगे। हालाँकि, पाकिस्तान अपने दावे पर अडिग रहा और अंततः प्रस्ताव को बदल दिया गया। 25 अप्रैल को, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी किया, जिसमें टीआरएफ का नाम लिए बिना पहलगाम हमले की निंदा की गई।
पहलगाम हमले का पृष्ठभूमि
पहलगाम हमला 22 अप्रैल को हुआ था। हमले के तुरंत बाद टीआरएफ ने जिम्मेदारी ली और एक बयान जारी कर कहा कि भारत सरकार कश्मीर में मुसलमानों को बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक बना रही है। हालाँकि, 26 अप्रैल को टीआरएफ इससे पीछे हट गया। संगठन के प्रवक्ता अहमद खालिद ने कहा कि पहलगाम हमले के लिए टीआरएफ को दोषी ठहराना गलत है और उनकी वेबसाइट हैक कर ली गई है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का बयान
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 25 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया। इस बयान में भारत और नेपाल के प्रति संवेदना व्यक्त की गई और कहा गया कि आतंकवाद अपने सभी रूपों में अंतर्राष्ट्रीय शांति के लिए एक बड़ा खतरा है। हमलों के अपराधियों और उनके समर्थकों को दंडित किया जाना चाहिए। हालाँकि, बयान में द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) का उल्लेख नहीं किया गया, जिसने हमले की जिम्मेदारी ली है।
पहलगाम हमले का उद्देश्य
पहलगाम हमले का उद्देश्य गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाकर सांप्रदायिक तनाव भड़काना था। हमले में 26 लोगों की मृत्यु हो गई और कई घायल हुए। यह हमला कश्मीर घाटी में शांति और स्थिरता को बड़ी चुनौती पेश करता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बयान में इस सांप्रदायिक उद्देश्य का उल्लेख नहीं किया गया है, जो कि एक महत्वपूर्ण पहलू है।
पाकिस्तान की भूमिका और आलोचना
पाकिस्तान के इस कदम को कई देशों ने आलोचना की निगाह से देखा है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों के साथ अपने रिश्तों को छिपाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान का दावा है कि वह केवल एक न्यायसंगत और संतुलित बयान चाहता था। यह विवाद पाकिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच तनाव को बढ़ा सकता है।
भविष्य की चुनौतियां
पहलगाम हमले के बाद कश्मीर घाटी में सुरक्षा स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है। भारत सरकार ने सुरक्षा उपायों को मजबूत करने का वादा किया है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई करने के लिए एकजुट होने की आवश्यकता पर जोर दे रहा है। पाकिस्तान को भी अपनी भूमिका को स्पष्ट करना होगा और आतंकवाद के खिलाफ अपनी गतिविधियों को मजबूत करना होगा।
पाकिस्तान का यूएनएससी बयान से टीआरएफ का नाम हटाना एक महत्वपूर्ण घटना है, जो अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और कश्मीर समस्या पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। यह घटना पाकिस्तान की आतंकवाद के प्रति नीति पर प्रकाश डालती है और भविष्य में कश्मीर घाटी में शांति और स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने और सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
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