अहमदिया मुस्लिमों से जबरन हलफनामा भरवाया गया
Pakistan Eid Ban Ahmadiyya Muslims Punjab Province : पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अहमदिया मुस्लिम समुदाय पर एक बार फिर से कठोर प्रतिबंध लगाया गया है। इस बार बात सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं रही, बल्कि ईद जैसे पवित्र त्योहार को मनाने पर भी रोक लगा दी गई है।
पंजाब और सिंध प्रांतों में सरकारी स्तर पर अहमदियों को चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने 7 जून को ईद मनाई, तो उन्हें ₹5 लाख का जुर्माना भरना पड़ेगा। इसके साथ ही कई जगहों पर पुलिस जबरन हलफनामा भरवा रही है, जिसमें उन्हें वचन देना पड़ रहा है कि वे कुर्बानी या ईद की कोई धार्मिक रस्म अदा नहीं करेंगे।
🔴 क्या हो रहा है अहमदिया समुदाय के साथ?
- हलफनामे का डर: पुलिस और प्रशासन अहमदिया समुदाय के लोगों को डरा-धमका कर हलफनामा भरवा रहे हैं, जिससे वे अपनी धार्मिक स्वतंत्रता को त्यागने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
- धार्मिक स्थलों पर हमले: कई कट्टरपंथी संगठन TLP (तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान) और TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) लंबे समय से अहमदियों के मस्जिदों, कब्रिस्तानों, और धार्मिक सभाओं पर हमला करते आए हैं।
- एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट: जून 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में 36 अहमदियों को गिरफ्तार किया गया ताकि उन्हें ईद की कुर्बानी करने से रोका जा सके।
❌ 1974 में ही हटा दी गई थी मुस्लिम पहचान
पाकिस्तान की 1974 की संविधानिक संशोधन के मुताबिक, अहमदिया मुस्लिमों को “गैर-मुस्लिम” घोषित कर दिया गया।
इसके बाद से उन्हें:
- कुरान पढ़ने,
- नमाज अदा करने,
- मस्जिद कहने या जाने,
- यहां तक कि “अस्सलाम अलैकुम” कहने तक से रोका जाता है।
📜 लाहौर बार का विवादास्पद पत्र
लाहौर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने IG पंजाब को पत्र लिखकर कहा कि अहमदिया मुस्लिम इस्लामी रीति-रिवाज नहीं अपना सकते, क्योंकि इससे “असली मुसलमानों” की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
बार के अध्यक्ष मलिक आसिफ का कहना है कि:
“ईद की कुर्बानी सिर्फ मुस्लिम कर सकते हैं, अगर अहमदिया ऐसा करते हैं, तो यह कानून और धर्म का उल्लंघन है।”
🌍 कौन हैं अहमदिया मुस्लिम?
मिर्जा गुलाम अहमद ने 1889 में पंजाब के कादियान गांव से इस समुदाय की शुरुआत की थी। उन्होंने खुद को “खलीफा” घोषित किया और कहा कि वे शांति, प्रेम और सत्य के प्रचारक हैं।
अहमदिया मुस्लिम:
- किसी भी धर्म के संतों और संस्थापकों की शिक्षाओं को मानते हैं।
- बुद्ध, ईसा, कृष्ण, गुरु नानक, कन्फ्यूशियस जैसे महापुरुषों की शिक्षाओं से इस्लाम को जोड़ते हैं।
- खुद को सच्चा मुसलमान मानते हैं लेकिन पाकिस्तान सरकार उन्हें गैर-मुस्लिम घोषित कर चुकी है।
📊 पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय की स्थिति
- कुल जनसंख्या: लगभग 20 लाख
- सबसे अधिक उत्पीड़न पंजाब और सिंध में
- कानूनन धार्मिक स्वतंत्रता नहीं
- धार्मिक स्थलों पर ताले, तोड़फोड़ और हमले आम
- मौलिक अधिकारों से वंचित
🚨 दुनिया क्या कह रही है?
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच, और UNHRC ने पाकिस्तान सरकार से कई बार अपील की है कि अहमदिया समुदाय के मौलिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
लेकिन कट्टरपंथी संगठनों और राजनीतिक दबाव के चलते, पाकिस्तान में स्थिति हर साल बदतर होती जा रही है।
🤔 ईद पर भी बैन क्यों?
- कट्टरपंथी संगठनों का तर्क है कि “गैर-मुस्लिमों” को मुस्लिम त्योहार नहीं मनाना चाहिए।
- सरकार और प्रशासन इस विचार को सीधे या परोक्ष रूप से समर्थन देते हैं।
- इससे अहमदियों की धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता दोनों खतरे में हैं।
Pakistan Eid Ban Ahmadiyya Muslims Punjab Province : क्या यह धार्मिक उत्पीड़न नहीं?
पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों के साथ जो हो रहा है, वह न सिर्फ धार्मिक उत्पीड़न है, बल्कि एक आधुनिक लोकतंत्र में मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन भी है।
ईद जैसे पवित्र त्योहार पर रोक लगाना, जबरन हलफनामा भरवाना, और 5 लाख रुपए जुर्माने की धमकी देना—ये सब धार्मिक असहिष्णुता की मिसालें हैं।
जब तक पाकिस्तान इस दोहरे रवैये से बाहर नहीं निकलता, अल्पसंख्यकों की हालत वहां और बिगड़ती जाएगी।
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