इस्लामाबाद |पाकिस्तान चीन के JF-17 फाइटर जेट्स की मदद से अपना विदेशी कर्ज चुका रहा है। देश ने नाइजीरिया, अजरबैजान, लीबिया, सऊदी अरब, मोरक्को, इंडोनेशिया, इथियोपिया और सूडान जैसे देशों को ये जेट्स बेचे हैं।
पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) और चीन की चेंडु एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (CAC) का जॉइंट वेंचर कामरा में चल रहा है। इस प्रोडक्शन यूनिट को चीन लगभग पूरी तरह ऑपरेट करता है और यहां 500 से अधिक चीनी एयरोनॉटिकल इंजीनियर काम कर रहे हैं। कामरा यूनिट से हर साल लगभग 50 JF-17 फाइटर जेट्स का उत्पादन होता है।
सऊदी अरब को जेट बेचकर 18 हजार करोड़ चुकाए
पाकिस्तान ने चीन के जेट बेचकर सऊदी अरब को 18 हजार करोड़ रुपए का कर्ज चुका दिया। पाकिस्तान पर सऊदी का कुल कर्ज लगभग 70 हजार करोड़ रुपए है। इस डील को “ऑलवेज़ ब्रदर” नाम दिया गया है। JF-17 फाइटर जेट की कीमत लगभग 200 करोड़ रुपए है, जिसमें 80% से ज्यादा हिस्सा चीन के हिस्से में जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान और चीन इस डील के जरिए हथियारों की बैटल रेडीनेस और वैश्विक हथियार बाजार में अपनी पकड़ दिखा रहे हैं। चीन ने पिछले 47 सालों में किसी भी देश के साथ युद्ध नहीं किया है, लेकिन पाकिस्तान इन हथियारों का उपयोग भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ कर इसे “बैटल रेडी” मार्केटिंग में पेश कर रहा है।
तुर्की के ड्रोन में भी साझेदारी
पाकिस्तान ने चीन के अलावा तुर्की के साथ भी हथियार निर्माण की योजना बनाई है। लाहौर के पास तुर्की के कामीकाजी (आत्मघाती) ड्रोन की संयुक्त यूनिट अगले साल स्थापित होगी। पाकिस्तान का लक्ष्य है कि सालाना लगभग 200 ड्रोन का उत्पादन किया जाए और उन्हें एक्सपोर्ट भी किया जाएगा।
