पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक ऐसी खबर आई है जिसने सिख समुदाय ही नहीं, कई मानवाधिकार संगठनों को भी बेचैन कर दिया है। एबटाबाद शहर में स्थित एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे की जमीन बेचे जाने और इमारत गिराने की अनुमति देने का मामला सामने आया है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि एक सरकारी अधिकारी ने करीब 1 करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर यह परमिशन दी। हालांकि आधिकारिक स्तर पर अभी पूरी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
एबटाबाद का ऐतिहासिक गुरुद्वारा विवाद में
बताया जा रहा है कि यह मामला Gurdwara Guru Singh Sabha से जुड़ा है, जो Abbottabad में स्थित है। स्थानीय सिख संगठनों का कहना है कि गुरुद्वारा पहले से ही जर्जर हालत में था, लेकिन उसे संरक्षित करने के बजाय कथित तौर पर बेच दिया गया। अब खबर है कि खरीदार इस जमीन पर अपनी दो पत्नियों के लिए बुटीक बनवाने की तैयारी कर रहा है। यह दावा सोशल मीडिया और स्थानीय रिपोर्टों में सामने आया है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
रिश्वत का आरोप, जांच की मांग
सिख नेताओं का आरोप है कि एक स्थानीय अधिकारी ने लगभग 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये लेकर ध्वस्तीकरण की अनुमति दी। धार्मिक संगठनों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक इमारत का मुद्दा नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों की धार्मिक पहचान और विरासत से जुड़ा सवाल है।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक स्थलों पर सवाल
Pakistan में सिख और हिंदू समुदाय की ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर पहले भी विवाद उठते रहे हैं। कई बार उपेक्षा, कब्जे या तोड़फोड़ की शिकायतें सामने आई हैं।मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि प्रभावित होती है।
सिख समुदाय में नाराजगी
स्थानीय सिख प्रतिनिधियों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर गुरुद्वारा ऐतिहासिक धरोहर की सूची में था, तो उसकी बिक्री और तोड़फोड़ कैसे संभव हुई?
इस बीच सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई लोग इसे धार्मिक असहिष्णुता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे प्रशासनिक भ्रष्टाचार का मामला बता रहे हैं।
