pahalgam terror attack kalma family survives assam :🧕 “ला इलाहा इल्लल्लाह” कहकर बचाई जान
pahalgam terror attack kalma family survives assam : श्रीनगर/सिलचर: एक असमिया ब्राह्मण परिवार की बुद्धिमानी और इंसानी समझदारी ने उन्हें एक संभावित आतंकी हमले में मौत के मुंह से खींच लिया।
असम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य और उनका परिवार, पहलगाम हमले में आतंकियों की नजर में आने के बावजूद सिर्फ इसलिए बच गए क्योंकि वे ‘कलमा’ पढ़ सके।
🔫 21 अप्रैल को क्या हुआ था?
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भट्टाचार्य परिवार छुट्टियां मनाने कश्मीर आया था।
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वे पहलगाम के बैसरन पहुंचे ही थे कि गोलियों की आवाज़ गूंजने लगी।
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देखते ही देखते दो आतंकियों ने दो पर्यटकों को गोली मार दी।
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इलाके में 15 राउंड तक फायरिंग हुई, जो पूरी जगह को युद्ध के मैदान में बदल गई।
🧎 एक पेड़ के नीचे ज़िंदगी की लड़ाई
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भट्टाचार्य, उनकी पत्नी और बेटा एक पेड़ के नीचे लेट गए।
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अन्य लोग “ला इलाहा इल्लल्लाह” पढ़ते दिखे।
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प्रोफेसर ने भी वही शब्द दोहराने का फैसला लिया।
“मुझे लगा यही सही है… और हमने भी वही कहना शुरू कर दिया।”
🔫 आतंकी उनके पास आया, बंदूक तानी
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एक आतंकी ने भट्टाचार्य के सिर पर बंदूक तानी और पूछा – ‘क्या बोल रहे हो?’
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उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, सिर्फ कलमा दोहराते रहे।
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आतंकी कुछ देर तक इर्द-गिर्द चक्कर काटता रहा… और फिर चला गया।
🏃 ढाई घंटे की चढ़ाई, और फिर मिली रिहाई
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परिवार धीरे-धीरे उस स्थान से भाग निकला।
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वे ढाई घंटे पैदल चलकर एक गांव पहुंचे, जहां मोबाइल नेटवर्क मिला।
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एक स्थानीय मुस्लिम महिला ने मदद की, ड्राइवर को जानकारी दी और परिवार को सुरक्षित नीचे उतारा गया।
🛶 अब वापसी का मन: कश्मीर की यादें नहीं भूलाई जाएंगी
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उनका 26 अप्रैल को लौटने का प्लान था, लेकिन इस घटना के बाद परिवार पहले ही वापसी का सोच रहा है।
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असम प्रशासन भी परिवार के संपर्क में है।
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भट्टाचार्य ने कहा,
“भगवान ने हमें बचा लिया… लेकिन यह घटना ज़िंदगी भर साथ रहेगी।”
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