पहलगाम में इंसानियत का कत्ल TRF ने लिया ज़िम्मा, UN ने भी माना!
22 अप्रैल 2025 की सुबह पहलगाम की वादियों में एक खास सुकून था। मौसम साफ़ था, बर्फ़ के ढेर दूर चमक रहे थे, और पर्यटक इस हसीन घाटी की गोद में सुकून तलाश रहे थे। लेकिन दोपहर होते-होते वही वादियां खून से लाल हो गईं। एक के बाद एक गोलियों की आवाज़ गूंजने लगी और सब कुछ हमेशा के लिए बदल गया।

मैं उस वक़्त वहां नहीं था, लेकिन वहां मरने वाले 26 लोगों में से एक मेरा कज़िन भी था। नेपाल से आया था, घूमने। क्या मालूम था कि उसकी जिंदगी का सबसे अच्छा ट्रिप, आख़िरी साबित होगा।
कौन हैं ये लोग जो इंसानियत को गोली मारते हैं?
22 अप्रैल की शाम को एक नाम सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा था TRF (The Resistance Front)। पहले तो लगा, कोई और ग्रुप होगा जो बस नाम के लिए ज़िम्मेदारी ले रहा है। लेकिन जब उन्होंने हमले के फोटो पोस्ट किए, और फिर दुबारा जिम्मेदारी ली, तब रूह कांप गई।
26 अप्रैल को उन्होंने बयान बदल दिया बोले कि वेबसाइट हैक हो गई थी। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मरने वालों के घरों में रौशनी बुझ चुकी थी और मातम के साए तारी हो चुके थे।
UN ने माना TRF ही है जिम्मेदार
अब संयुक्त राष्ट्र (UN) की 36वीं ग्लोबल टेररिज्म रिपोर्ट ने साफ़-साफ़ कहा है कि इस हमले के पीछे TRF ही है। उन्होंने हमले की दो बार जिम्मेदारी ली, और उस वक्त लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का नाम भी सामने आया।
UN की रिपोर्ट का प्वाइंट नंबर 84 सिर्फ इसी हमले पर है। एक सदस्य देश ने यहां तक कहा कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा की मदद के बिना यह हमला संभव नहीं था।
पाकिस्तानी दबाव और राजनीतिक चुप्पी
25 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र ने जब प्रेस बयान दिया, तो TRF का नाम उसमें नहीं था। क्यों? क्योंकि पाकिस्तान ने साफ तौर पर इसका विरोध किया। उनके विदेश मंत्री ने खुद माना कि उन्होंने TRF का नाम हटवाने की कोशिश की और कामयाब भी हुए।
दुनिया की सबसे बड़ी संस्था भी जब सच कहने से डरती है, तब दर्द और गहरा होता है।
अमेरिका ने TRF को ठहराया आतंकवादी
18 जुलाई को अमेरिका ने TRF को FTO (Foreign Terrorist Organization) और SDGT (Specially Designated Global Terrorist) घोषित किया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि TRF लश्कर का प्रॉक्सी है और ये हमला 2008 के मुंबई अटैक के बाद भारत पर लश्कर का सबसे बड़ा हमला है।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका का शुक्रिया अदा करते हुए कहा आतंकवाद के लिए ज़ीरो टॉलरेंस की नीति ही एकमात्र रास्ता है।
ISI और लश्कर की मिलीभगत का नतीजा
TRF कोई पुराना नाम नहीं है। 2019 में आर्टिकल-370 हटाए जाने के बाद इस संगठन का जन्म हुआ। सुरक्षा एजेंसियां शुरू से कहती रही हैं कि ये लश्कर का नया मुखौटा है। ISI हैंडलर्स की मदद से खड़ा किया गया ये संगठन, कश्मीर में नई पीढ़ी को कट्टरपंथ की आग में झोंक रहा है।

वे सिर्फ गोलियां नहीं चलाते वे डर फैलाते हैं। युवाओं के दिलों में जहर भरते हैं, ताकि इंसानियत मर जाए।
जब सच को राजनीति से दबाया जाता है, तब आम नागरिक मरते हैं
पहलगाम का हमला एक चेतावनी है। हमले सिर्फ बॉर्डर पर नहीं हो रहे अब वो हमारे पर्यटन स्थलों, स्कूलों, मंदिरों तक पहुंच रहे हैं। और जब तक अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं TRF जैसे संगठनों को सिर्फ कागज़ों पर नापसंद करती रहेंगी, तब तक TRF जैसे चेहरे बदलते रहेंगे, मौतें नहीं रुकेंगी।
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