‘ऑपरेशन महादेव’ चीनी डिवाइस बना आतंकियों की मौत की वजह
28 जुलाई 2025 को श्रीनगर से करीब 22 किलोमीटर दूर दाचीगाम के घने जंगलों में एक बड़ा एनकाउंटर हुआ। भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को मार गिराया। इनमें शामिल था पहलगाम टूरिस्ट अटैक का मास्टरमाइंड सुलेमान उर्फ आसिफ।

सूत्रों के अनुसार, आतंकियों के ठिकाने का पता एक चीनी सैटेलाइट डिवाइस (Ultrasat Communication Device) से लगे सिग्नल के जरिए चला। इसी डिवाइस की मदद से सेना को आतंकियों की सटीक लोकेशन मिली और ऑपरेशन ‘महादेव’ को अंजाम दिया गया।
पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड था सुलेमान
सुलेमान पाकिस्तान का रहने वाला था और लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर माना जाता था। अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले में उसने 25 टूरिस्ट और एक गाइड की बेरहमी से हत्या की थी। सुलेमान पहले भी 2024 में सोनमर्ग टनल हमले में शामिल रह चुका था।
ऑपरेशन महादेव: ऐसे हुआ आतंक का सफाया
दाचीगाम के घने जंगलों में लगातार हो रही बारिश की वजह से आतंकियों ने एक तिरपाल (टेंट) लगाया था, जिससे उनका ठिकाना दिख गया। करीब 6 घंटे चली मुठभेड़ में सेना ने तीनों आतंकियों को मार गिराया। इस ऑपरेशन को माउंट महादेव की नजदीकी वजह से ‘ऑपरेशन महादेव’ नाम दिया गया।

मारे गए तीनों आतंकियों की पहचान
- सुलेमान उर्फ आसिफ: लश्कर का टॉप कमांडर, कई आतंकी हमलों में शामिल।
- जिब्रान उर्फ यासिर: सुलेमान का साथी, सोनमर्ग हमले में भी सक्रिय भूमिका।
- हमजा अफगानी उर्फ अबू हमजा: अफगान मूल का आतंकी, पहलगाम हमले में संभावित संलिप्तता।
क्यों बना सैटेलाइट डिवाइस खतरा?

आतंकियों ने चीनी तकनीक से बनी सैटेलाइट डिवाइस का इस्तेमाल कर आपस में संपर्क बनाए रखा। लेकिन यही डिवाइस उनकी मौत की वजह बन गई। भारतीय एजेंसियों ने सिग्नल ट्रैक कर उन्हें पकड़ लिया।
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