
Padma Shri Ram Sahay Pandey : लोकनृत्य राई को जीवन किया समर्पित
Padma Shri Ram Sahay Pandey : बुंदेलखंड के मशहूर लोकनृत्य राई को देश और दुनिया में मशहूर करने वाले पं. रामसहाय पांडे ने मंगलवार सुबह 5.30 बजे अंतिम सांस ली. उनका इलाज सागर के निजी अस्पताल में चल रहा था. कई दिनों से पद्मश्री रामसहाय पांडे अस्वस्थ चल रहे थे.
पद्मश्री रामसहाय पांडे का 98 साल की उम्र में निधन
ब्राह्मण परिवार में जन्मे रामसहाय पांडे ने राई जैसे लोकनृत्य में काफी नाम कमाया और देश और दुनिया में राई को मशहूर करने में योगदान दिया. भारत सरकार ने 2022 में रामसहाय पांडे को पद्मश्री से सम्मानित किया था. राई लोकनृत्य की साधना को लेकर मशहूर पं.रामसहाय पांडे ने 98 साल की उम्र में मंगलवार तड़के सागर के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली. पहले उनका इलाज भोपाल में चल रहा था.
बचपन से ही राई की साधना में लीन
रामसहाय पांडे का जन्म 11 मार्च 1933 को सागर के मडधार पठा में हुआ था. गरीब ब्राह्मण परिवार में जन्मे रामसहाय पांडे बचपन से ही राई नृत्य की सतत साधना में जुट गए. 11 साल की उम्र में राई नृत्य में मृदंग बजाने लगे थे. हालांकि उस समय बुंदेलखंड में राई नृत्य को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता था. ऐसे में उन्हें सामाजिक बहिष्कार भी झेलना पड़ा. इसके बाद वह अपना गांव छोड़कर सागर के कनेरादेव में बस गए और जीवनभर राई नृत्य की साधना में जुटे रहे.
विदेश तक बजाया राई का डंका
सामाजिक बहिष्कार और अपमान के बाद भी पं. रामसहाय पांडे ने अपनी साधना जारी रखी और राई नृत्य की मंचीय प्रस्तुति में एक अलग पहचान बनायी. उन्होंने देश के तमाम प्रदेशों में राई नृत्य का प्रदर्शन किया. यहां तक कि वह दुबई, जापान,जर्मनी, हंगरी और स्विटजरलैंड जैसे देशों में राई की प्रस्तुति दे चुके थे. पद्मश्री मिलने के बाद उनकी प्रतिष्ठा काफी बढ़ गई थी.
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