Ovarian Cyst Treatment: महिलाओं में रिप्रोडक्टिव सिस्टम से जुड़ी बीमारियों की समस्या पिछले कुछ वर्षों से ज्यादा देखने को मिल रही है। खासतौर पर बच्चेदानी में गांठ (Ovarian Cyst) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रुप में सामने आ रही है। यह समस्या अक्सर महिलाओं की फर्टीलिटी को प्रभावित करती है। अगर समय से इलाज न किया जाए तो यह समस्या काफी खतरनाक भी हो सकती है।
ओवरी (अंडाशय) महिलाओं की रिप्रोडक्टिव सिस्टम का अहम हिस्सा है, जो गर्भाशय के दोनों ओर स्थित होती है। इनका काम अंडे का निर्माण करना और एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन करना होता है। जब ओवरी में असामान्य रुप से थैली जैसी संरचना (सिस्ट) बन जाती है, तो इसे ही ओवेरियन सिस्ट या बच्चेदानी में गांठ कहा जाता है।
बच्चेदानी में गांठ क्यों होती है?
आमतौर पर महिलाओं के मासिक चक्र के दौरान अंडाणु बनने के बाद फॉलिकल का आकार धीरे-धीरे छोटा हो जाता है। लेकिन कई बार यह फॉलिकल सिकुड़ता नहीं है और इसमें तरल पदार्थ भरने लगता है। यही स्थिति ओवेरियन सिस्ट का रूप ले लेती है।
ज्यादातर मामलों में ये सिस्ट हानिकारक नहीं होते और समय के साथ अपने आप खत्म हो जाते हैं। लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें, बड़े आकार के हो जाएं या बार-बार दर्द और परेशानी देने लगें तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।

ओवेरियन सिस्ट के प्रमुख लक्षण (Symptoms of Ovarian Cyst)
शुरुआती अवस्था में सिस्ट के लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन जैसे-जैसे इनका आकार बढ़ता है, महिलाओं को कई परेशानियां महसूस होने लगती हैं। इनमें से कुछ आम लक्षण इस प्रकार हैं:-
1. पेट में सूजन या भारीपन महसूस होना।
2. मल त्याग या पेशाब के दौरान दर्द।
3. मासिक धर्म से पहले या दौरान पैल्विक दर्द।
4. संभोग के दौरान असहजता या दर्द।
5. पीठ के निचले हिस्से और जांघों में दर्द।
6. स्तनों में भारीपन या दर्द।
7. बार-बार चक्कर आना या बेहोशी महसूस होना।
8. तेज-तेज सांस लेना और थकान।
9. जी मिचलाना या उल्टी जैसा लगना।
10. कभी-कभी बुखार आना।
इनमें से कोई भी लक्षण लगातार दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।
ओवेरियन सिस्ट के कारण (Causes of Ovarian Cyst)
ओवरी में गांठ बनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें से मुख्य हैं:
1. हॉर्मोनल असंतुलन – पीसीओडी (PCOD) और पीसीओएस (PCOS) जैसी स्थितियों में अक्सर ओवरी में सिस्ट बन जाते हैं।
2. फॉलिकल का न सिकुड़ना – पीरियड्स खत्म होने के बाद भी फॉलिकल का आकार कम न होना और तरल पदार्थ का जमा होना।
3. अनहेल्दी लाइफस्टाइल – ज्यादा जंक फूड, तनाव, नींद की कमी और व्यायाम न करना।
4. वजन का बढ़ना – मोटापा महिलाओं के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़कर ओवेरियन सिस्ट की संभावना बढ़ा देता है।
5. अनुवांशिक कारण – परिवार में किसी महिला को यह समस्या रही हो तो अगली पीढ़ी में इसका खतरा ज्यादा होता है।

ओवेरियन सिस्ट के खतरे…
हालांकि अधिकतर सिस्ट हानिकारक नहीं होते, लेकिन कुछ मामलों में यह खतरनाक भी साबित हो सकते हैं। जैसे –
1. सिस्ट फट जाने पर आंतरिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) हो सकती है।
2. बहुत बड़े सिस्ट ओवरी के आकार को बिगाड़ सकते हैं।
3. समय रहते इलाज न होने पर यह प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) को प्रभावित कर सकते हैं।
ओवेरियन सिस्ट से बचाव के उपाय (Prevention of Ovarian Cyst)
महिलाएं अपनी जीवनशैली और खान-पान में बदलाव करके इस समस्या से काफी हद तक बच सकती हैं। कुछ अहम उपाय:
1. योग और प्राणायाम करें – रोजाना कम से कम 30 मिनट योग व हल्की कसरत करें।
2. संतुलित आहार लें – प्रोटीन से भरपूर आहार, हरी पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फल खाएं।
3. रेशेदार फूड्स शामिल करें – साबुत अनाज, दालें और फाइबर युक्त भोजन लें।
4. भरपूर पानी पिएं – दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।
5. नींद पूरी करें – रात को जल्दी सोएं और सुबह समय पर उठें।
6. जंक फूड से दूरी बनाएं – तैलीय और पैक्ड फूड की जगह घर पर बने व्यंजन खाएं।
7. तनाव से बचें – मेडिटेशन, किताब पढ़ने या पसंदीदा शौक से खुद को रिलैक्स करें।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर महिला को लगातार पेट दर्द, पीरियड्स में अनियमितता, पेट में गांठ जैसा महसूस होना, अचानक वजन बढ़ना या बार-बार चक्कर आने जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट के जरिए इसका सही निदान कर सकते हैं।
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