संसद में मचा तूफान: सवाल-जवाब और सियासी घमासान
28 जुलाई 2025 को मानसून सत्र के छठे दिन लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर व पहलगाम हमले पर 16 घंटे की बहस शुरू हुई, जिसकी शुरुआत दोपहर 12 बजे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी इसमें शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बहस से पहले विरोधी हंगामा
सत्र के पहले दिन विपक्ष प्रदर्शन करता रहा यूनीट्रा SIR मुद्दे और ऑपरेशन सिंदूर पर तत्काल बहस की माँग लेकर। विरोध के चलते घर कई बार स्थगित हुआ।
बहस का असर और राजनीतिक माहौल
विपक्ष का गुस्सा
- राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव जैसे नेता सरकार से पूछ रहे हैं अप्रिल में हुए पहलगाम हमले के समय खुफिया चूक कैसे हुई, ये आतंकी अभी क्यों फरार हैं, और सरकार ने प्रतिक्रिया में कितना पारदर्शी निर्णय लिया।
- सिद्धांततः, वे मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री और गृह, विदेश व रक्षा मंत्री इस चर्चा में मौजूद रहें।
सरकार की तैयारी
- सरकार ने 16 घंटे की लंबी बहस को मंजूरी दी है लोकसभा में 16 घंटे और राज्यसभा में 9 घंटे।
- राजनाथ सिंह बहस की शुरुआत करेंगे; अमित शाह और एस. जयशंकर भी मौजूद होंगे PM मोदी की भागीदारी अभी स्पष्ट नहीं।
- PM मोदी ने हाल ही में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवादियों को स्पष्ट संदेश दिया है और अब भारत “युद्ध की तरह” प्रतिक्रिया देगा।
पॉलिटिकल तनाव की वजहें
- पहले से चल रहे विवाद, जैसे: SIR (Bihar की Special Intensive Revision), विपक्ष की वोटर वेरिफिकेशन चिंता, और कांग्रेस की कुराकानी।
- विपक्षी नेता जैराम रमेश ने मोदी सरकार की तुलना पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से की जहाँ 1999 के कारगिल संकट के तुरंत बाद समीक्षा पैनल बनाया गया था, वहीं अब समय-सीमा में देरी से पारदर्शिता का सवाल उठ रहा है।
यह बहस सिर्फ नेताओं के भाषण नहीं है यह राष्ट्र की आत्मा, उसकी सुरक्षा नीति व पारदर्शिता का सफर है। विपक्ष अपेक्षा कर रहा है कि इस चर्चा से जनता को सच मालूम हो सके और सरकार की जवाबदेही स्पष्ट हो। वहीं सरकार इसे राष्ट्रीय संकल्प और विरोधी नरेटिव को टक्कर देने का प्लेटफ़ॉर्म मानती है।
Read More:- PM मोदी की राजनीतिक यात्रा: मोदी ने इंदिरा गांधी का 48 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा!
Watch Now :- गाजीपुर में मिला तैरता हुआ ‘#रामशिला’ पत्थर! देखें #रहस्यमयी वीडियो
